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Aao, Teerthyatra Karen-Prempal Sharma

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Aao, Teerthyatra Karen-Prempal Sharma

Aao, Teerthyatra Karen-Prempal Sharma

About the Products:

यात्रा-संस्मरण साहित्य की बड़ी जीवंत विधा है, जिसमें पहाड़ों की गूंज, नदियों की कल-कल और पक्षियों की मीठी चह-चह की तरह जीवन और जीवन-रस छलछलाता नजर आता है। इनमें हमारा समय है तो मानव-आस्था की सुदीर्घ परंपरा भी। यात्रा-साहित्य, खासकर तीर्थों की यात्रा पर संस्मरण लिखने का मेरा एक ही उद्देश्य है कि हमारी युवा पीढ़ी हमारे पौराणिक, धार्मिक, आध्यात्मिक पवित्र तीर्थस्थलों के प्रति आकर्षित हो। तीर्थ का वर्णन पढ़कर उनमें वहाँ जाने की ललक पैदा हो। उन तीर्थों के प्रति श्रद्धाभाव जाग्रत् हो। उन्हें हमारी पौराणिक थाती पर गर्व महसूस हो। दूसरे, तीर्थाटन के शौकीन यात्रियों को भी, जहाँ भी वे जाना चाहें, वहाँ की सम्यक् जानकारी मिल सके। मेरे ये यात्रा संस्मरण उनके लिए एक प्रसन्न गाइड का काम कर सकें। उनका मार्ग-प्रदर्शन कर सकें। प्रस्तुत पुस्तक 'आओ, तीर्थयात्रा करें' के यात्रा-संस्मरण की विशेषता है कि ये पाठक के मन को बाँध लेते हैं। पाठक इन्हें पढ़ना शुरू करे तो पूरा पढ़े बिना रह नहीं सकता है। पाठक को लगता है, वह इन्हें पढ़ नहीं रहा, बल्कि चलचित्र की भाँति देख रहा है; लेखक के साथ-साथ यात्रा कर रहा है। विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में पाठकों का अपार प्यार-दुलार पाने के बाद अब ये यात्रा-संस्मरण पुस्तक रूप में पुनः पाठकों के सामने उपस्थित हैं। पत्र-पत्रिकाओं के पाठकों से इतर पाठक-बंधु भी अब इनका रसास्वादन सहजता से कर सकेंगे। पाठकों के हृदय में उतरकर अपना स्थान बना लेने वाले यात्रा-संस्मरणों की एक और रोचक, पठनीय-मननीय पुस्तक ।

Language: Hindi

Page No: 200

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

$18.76
Aao, Teerthyatra Karen-Prempal Sharma
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Description

Aao, Teerthyatra Karen-Prempal Sharma

About the Products:

यात्रा-संस्मरण साहित्य की बड़ी जीवंत विधा है, जिसमें पहाड़ों की गूंज, नदियों की कल-कल और पक्षियों की मीठी चह-चह की तरह जीवन और जीवन-रस छलछलाता नजर आता है। इनमें हमारा समय है तो मानव-आस्था की सुदीर्घ परंपरा भी। यात्रा-साहित्य, खासकर तीर्थों की यात्रा पर संस्मरण लिखने का मेरा एक ही उद्देश्य है कि हमारी युवा पीढ़ी हमारे पौराणिक, धार्मिक, आध्यात्मिक पवित्र तीर्थस्थलों के प्रति आकर्षित हो। तीर्थ का वर्णन पढ़कर उनमें वहाँ जाने की ललक पैदा हो। उन तीर्थों के प्रति श्रद्धाभाव जाग्रत् हो। उन्हें हमारी पौराणिक थाती पर गर्व महसूस हो। दूसरे, तीर्थाटन के शौकीन यात्रियों को भी, जहाँ भी वे जाना चाहें, वहाँ की सम्यक् जानकारी मिल सके। मेरे ये यात्रा संस्मरण उनके लिए एक प्रसन्न गाइड का काम कर सकें। उनका मार्ग-प्रदर्शन कर सकें। प्रस्तुत पुस्तक 'आओ, तीर्थयात्रा करें' के यात्रा-संस्मरण की विशेषता है कि ये पाठक के मन को बाँध लेते हैं। पाठक इन्हें पढ़ना शुरू करे तो पूरा पढ़े बिना रह नहीं सकता है। पाठक को लगता है, वह इन्हें पढ़ नहीं रहा, बल्कि चलचित्र की भाँति देख रहा है; लेखक के साथ-साथ यात्रा कर रहा है। विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में पाठकों का अपार प्यार-दुलार पाने के बाद अब ये यात्रा-संस्मरण पुस्तक रूप में पुनः पाठकों के सामने उपस्थित हैं। पत्र-पत्रिकाओं के पाठकों से इतर पाठक-बंधु भी अब इनका रसास्वादन सहजता से कर सकेंगे। पाठकों के हृदय में उतरकर अपना स्थान बना लेने वाले यात्रा-संस्मरणों की एक और रोचक, पठनीय-मननीय पुस्तक ।

Language: Hindi

Page No: 200

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