
Ajit Kumar Ki Lokpriya Kahaniyan-Ajit Kumar
Ajit Kumar Ki Lokpriya Kahaniyan-Ajit Kumar
About the Products:
अजितजी की कहानियों का यह संकलन उनकी सतत रचनाशीलता का गवाह है। इन कहानियों से गुजरते हुए उनकी रचना-प्रक्रिया का, उनके रचनाशिल्प का तथा कुछ रचनाओं में उनके विचार-पक्ष का भी दिग्दर्शन होता है। 'बात बोलेगी, हम नहीं' की तर्ज पर इन संकेत-सूत्रों से अजितजी की कथा-रचनाशीलता के विविध आयामों का पता खोजने की छोटी सी कोशिश की गई है। संग्रह में कुल डेढ़ दर्जन कहानियाँ हैं। कहानियों की विषयवस्तु मूलतः दैनिक जीवन से जुड़ी है। इस संग्रह को पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि ये कृत्रिम कहानियाँ नहीं हैं। वास्तव में कुछ तो इस तरह की हैं कि आपको लगे कि अरे, यह तो रोज मेरे घर में भी होता है। पाठकों से तादात्म्य बनाने के लिए कहानी के विषय का चुनाव बहुत महत्त्वपूर्ण है। अत्यंत सरल एवं सहज विषयों पर लगभग कही जाने वाली शैली में लिखी ये कहानियाँ खूब पठनीय बन पड़ी हैं। कुल मिलाकर संग्रह अपने नाम की सार्थकता सिद्ध करता है। ये कुछ कहानियाँ हैं, जो अपने समय में छपकर लोकप्रिय हुईं। इनकी लोकप्रियता के पीछे अजितजी की कहानी कहने की कला, विषयों का चुनाव और उनकी भाषा-शैली का योगदान तो था ही, साथ ही उनकी सूक्ष्म अवलोकन क्षमता और सहज बोध का भी उतना ही योगदान रहा।
Language: Hindi
Page No: 184
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
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Ajit Kumar Ki Lokpriya Kahaniyan-Ajit Kumar
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अजितजी की कहानियों का यह संकलन उनकी सतत रचनाशीलता का गवाह है। इन कहानियों से गुजरते हुए उनकी रचना-प्रक्रिया का, उनके रचनाशिल्प का तथा कुछ रचनाओं में उनके विचार-पक्ष का भी दिग्दर्शन होता है। 'बात बोलेगी, हम नहीं' की तर्ज पर इन संकेत-सूत्रों से अजितजी की कथा-रचनाशीलता के विविध आयामों का पता खोजने की छोटी सी कोशिश की गई है। संग्रह में कुल डेढ़ दर्जन कहानियाँ हैं। कहानियों की विषयवस्तु मूलतः दैनिक जीवन से जुड़ी है। इस संग्रह को पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि ये कृत्रिम कहानियाँ नहीं हैं। वास्तव में कुछ तो इस तरह की हैं कि आपको लगे कि अरे, यह तो रोज मेरे घर में भी होता है। पाठकों से तादात्म्य बनाने के लिए कहानी के विषय का चुनाव बहुत महत्त्वपूर्ण है। अत्यंत सरल एवं सहज विषयों पर लगभग कही जाने वाली शैली में लिखी ये कहानियाँ खूब पठनीय बन पड़ी हैं। कुल मिलाकर संग्रह अपने नाम की सार्थकता सिद्ध करता है। ये कुछ कहानियाँ हैं, जो अपने समय में छपकर लोकप्रिय हुईं। इनकी लोकप्रियता के पीछे अजितजी की कहानी कहने की कला, विषयों का चुनाव और उनकी भाषा-शैली का योगदान तो था ही, साथ ही उनकी सूक्ष्म अवलोकन क्षमता और सहज बोध का भी उतना ही योगदान रहा।
Language: Hindi
Page No: 184
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