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Aman Ke Farishtey - Brigadier Sushil Tanwar

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Aman Ke Farishtey - Brigadier Sushil Tanwar

Aman Ke Farishtey - Brigadier Sushil Tanwar

About The Product:

‘‘यह उपन्यास तकरीबन बीस-पच्चीस साल पहले जम्मू प्रांत के पुंछ ज़िले की पृष्ठभूमि पर है। उस वक्त वहाँ पर हालात आज से बहुत अलग थे। सीमा-पार से आतंकवाद अपने चरम पर था और आम आदमी की ज़िन्दगी बेहद सादा मगर खासी मुश्किल थी। उस संगीन दौर में आतंक के खिलाफ़ सुरक्षा बलों के काम करने के तरीके काफ़ी अलग थे। मसलन, आज जैसे सेनाटेक्नोलॉजी का प्रयोग करती है, तब ऐसा नहीं था। टेक्नोलॉजी से लैस शस्त्र, मोबाइल फ़ोन और सोशल मीडिया कुछ भी नहीं था। लेकिन एक पहलू तब भी उतना ही अहम था जितना आज है। और वह है आम आदमी का सुरक्षा बलों के साथ आपसी तालमेल।’’ अमन के फ़रिश्ते मिलिट्री इंटेलिजेंस के युवा आर्मी कैप्टन आशीष की पुंछ में हुई पहली पोस्टिंग की दास्तान है, जहाँ उसने ना सिर्फ़ जासूसी की दुनिया के अजीबोगरीब तरीकों में महारत हासिल की बल्कि वहाँ के लोगों के साथ मिलकर पूरे सूरनकोट शहर में अपना सिक्का भी जमाया। यह दास्तान सूरनकोट के उन आम लोगों की भी है जिन्होंने सेना के साथ मिलकर आतंकवादियों के खिलाफ़ जंग में बड़ी बहादुरी से अपना योगदान दिया। भारतीय सेना में कार्यरत ब्रिगेडियर सुशील तंवर ने अपने सैन्य जीवन के तकरीबन सत्रह साल जम्मू- कश्मीर में बिताए हैं। मुखबिर उनकी पहली किताब थी जो कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखी 10 कहानियों का संग्रह है, जिसे बहुत ही सराहा गया है। अमन के फ़रिश्ते ब्रिगेडियर तंवर की दूसरी किताब है।

Product Details:

  • Author: Brigadier Sushil Tanwar
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 176
  • Publication Date: 2026

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

  • $5.33

    Original: $15.22

    -65%
    Aman Ke Farishtey - Brigadier Sushil Tanwar

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    Aman Ke Farishtey - Brigadier Sushil Tanwar

    About The Product:

    ‘‘यह उपन्यास तकरीबन बीस-पच्चीस साल पहले जम्मू प्रांत के पुंछ ज़िले की पृष्ठभूमि पर है। उस वक्त वहाँ पर हालात आज से बहुत अलग थे। सीमा-पार से आतंकवाद अपने चरम पर था और आम आदमी की ज़िन्दगी बेहद सादा मगर खासी मुश्किल थी। उस संगीन दौर में आतंक के खिलाफ़ सुरक्षा बलों के काम करने के तरीके काफ़ी अलग थे। मसलन, आज जैसे सेनाटेक्नोलॉजी का प्रयोग करती है, तब ऐसा नहीं था। टेक्नोलॉजी से लैस शस्त्र, मोबाइल फ़ोन और सोशल मीडिया कुछ भी नहीं था। लेकिन एक पहलू तब भी उतना ही अहम था जितना आज है। और वह है आम आदमी का सुरक्षा बलों के साथ आपसी तालमेल।’’ अमन के फ़रिश्ते मिलिट्री इंटेलिजेंस के युवा आर्मी कैप्टन आशीष की पुंछ में हुई पहली पोस्टिंग की दास्तान है, जहाँ उसने ना सिर्फ़ जासूसी की दुनिया के अजीबोगरीब तरीकों में महारत हासिल की बल्कि वहाँ के लोगों के साथ मिलकर पूरे सूरनकोट शहर में अपना सिक्का भी जमाया। यह दास्तान सूरनकोट के उन आम लोगों की भी है जिन्होंने सेना के साथ मिलकर आतंकवादियों के खिलाफ़ जंग में बड़ी बहादुरी से अपना योगदान दिया। भारतीय सेना में कार्यरत ब्रिगेडियर सुशील तंवर ने अपने सैन्य जीवन के तकरीबन सत्रह साल जम्मू- कश्मीर में बिताए हैं। मुखबिर उनकी पहली किताब थी जो कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखी 10 कहानियों का संग्रह है, जिसे बहुत ही सराहा गया है। अमन के फ़रिश्ते ब्रिगेडियर तंवर की दूसरी किताब है।

    Product Details:

  • Author: Brigadier Sushil Tanwar
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 176
  • Publication Date: 2026

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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