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Arthik Vikas Aur Sansadiya Loktantrik Pranali Book In Hindi-Narendra Pathak

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Arthik Vikas Aur Sansadiya Loktantrik Pranali Book In Hindi-Narendra Pathak

Arthik Vikas Aur Sansadiya Loktantrik Pranali Book In Hindi-Narendra Pathak

About the Products:

संसद् की अस्थिरता आज एक समस्या है और इसके कुपरिणाम भी हैं, जिन्हें नकारा नहीं जा सकता। किंतु इसके कारणों पर विचार किए बिना समस्या का निदान खोजना सतही और मनोवादी (subjectivism) विचार होगा। संसद् की अस्थिरता को एक शोध विषय के रूप में विश्लेषण करने संबंधी शोध साहित्य का अभाव सा है, कोई प्रामाणिक साहित्य शायद ही उपलब्ध हो। हाँ, संसदीय बहसों में ऐसे सवाल जरूर उठते रहे हैं और उनके निदान के रूप में ऊपर वर्णित तर्क दिए जाते रहे हैं। दल- बदल विरोधी एक कानून भी है तथा संसद् को सुचारु रूप से चलाने, उसके फैसलों को लागू करने संबंधी संसदीय तंत्र से लेकर नौकरशाही के एक ढाँचे संबंधी साहित्य जरूर उपलब्ध है। किंतु इस साहित्य की स्थापना का कारण यह है कि क्षेत्रीय दलों की बहुलता ही इस अस्थिरता का मूल कारण है और संसद् की अस्थिरता के कारण विकास अवरुद्ध होता है। इस पुस्तक का मूल ध्येय यह पता लगाना है कि क्षेत्रीय दलों के कारण संसद् में अस्थिरता आती है, जिसके कारण विकास कार्यों में बाधा आती है या असंतुलित वर्गीय और क्षेत्रीय विकास को संसद् द्वारा नहीं रोक पाने के कारण क्षेत्रीय दलों का निर्माण होता है और संसद् की अस्थिरता बढ़ती जाती है ?

Language: Hindi

Page No: 336

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

$24.58
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Arthik Vikas Aur Sansadiya Loktantrik Pranali Book In Hindi-Narendra Pathak

About the Products:

संसद् की अस्थिरता आज एक समस्या है और इसके कुपरिणाम भी हैं, जिन्हें नकारा नहीं जा सकता। किंतु इसके कारणों पर विचार किए बिना समस्या का निदान खोजना सतही और मनोवादी (subjectivism) विचार होगा। संसद् की अस्थिरता को एक शोध विषय के रूप में विश्लेषण करने संबंधी शोध साहित्य का अभाव सा है, कोई प्रामाणिक साहित्य शायद ही उपलब्ध हो। हाँ, संसदीय बहसों में ऐसे सवाल जरूर उठते रहे हैं और उनके निदान के रूप में ऊपर वर्णित तर्क दिए जाते रहे हैं। दल- बदल विरोधी एक कानून भी है तथा संसद् को सुचारु रूप से चलाने, उसके फैसलों को लागू करने संबंधी संसदीय तंत्र से लेकर नौकरशाही के एक ढाँचे संबंधी साहित्य जरूर उपलब्ध है। किंतु इस साहित्य की स्थापना का कारण यह है कि क्षेत्रीय दलों की बहुलता ही इस अस्थिरता का मूल कारण है और संसद् की अस्थिरता के कारण विकास अवरुद्ध होता है। इस पुस्तक का मूल ध्येय यह पता लगाना है कि क्षेत्रीय दलों के कारण संसद् में अस्थिरता आती है, जिसके कारण विकास कार्यों में बाधा आती है या असंतुलित वर्गीय और क्षेत्रीय विकास को संसद् द्वारा नहीं रोक पाने के कारण क्षेत्रीय दलों का निर्माण होता है और संसद् की अस्थिरता बढ़ती जाती है ?

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Page No: 336

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