HomeStore

Ashtavakra Gita By Swami Prakhar Pragyanand | The Supreme Truth Of Existence | Spiritual Bhagwad Book (Geeta) On Self-Realization Enlightenment-Swami Prakhar Pragyanand

Product image 1

Ashtavakra Gita By Swami Prakhar Pragyanand | The Supreme Truth Of Existence | Spiritual Bhagwad Book (Geeta) On Self-Realization Enlightenment-Swami Prakhar Pragyanand

Ashtavakra Gita By Swami Prakhar Pragyanand | The Supreme Truth Of Existence | Spiritual Bhagwad Book (Geeta) On Self-Realization Enlightenment-Swami Prakhar Pragyanand

About the Products:

अष्‍टावक्र गीता भारतीय पौराणिक साहित्य-भंडार में एक-से-एक अप्रतिम बहुमूल्य रत्‍न भरे पड़े हैं। अष्‍टावक्र गीता अध्यात्म का शिरोमणि ग्रंथ है। इसकी तुलना किसी अन्य ग्रंथ से नहीं की जा सकती। अष्‍टावक्रजी बुद्धपुरुष थे, जिनका नाम अध्यात्म-जगत् में आदर एवं सम्मान के साथ लिया जाता है। कहा जाता है कि जब वे अपनी माता के गर्भ में थे, उस समय उनके पिताजी वेद-पाठ कर रहे थे, तब उन्होंने गर्भ से ही पिता को टोक दिया था—‘शास्‍‍त्रों में ज्ञान कहाँ है? ज्ञान तो स्वयं के भीतर है! सत्य शास्‍‍त्रों में नहीं, स्वयं में है।’ यह सुनकर पिता ने गर्भस्थ शिशु को शाप दे दिया, ‘तू आठ अंगों से टेढ़ा-मेढ़ा एवं कुरूप होगा।’ इसीलिए उनका नाम ‘अष्‍टावक्र’ पड़ा। ‘अष्‍टावक्र गीता’ में अष्‍टावक्रजी के एक-से-एक अनूठे वक्‍तव्य हैं। ये कोई सैद्धांतिक वक्‍तव्य नहीं हैं, बल्कि प्रयोगसिद्ध वैज्ञानिक सत्य हैं, जिनको उन्हेंने विदेह जनक पर प्रयोग करके सत्य सिद्ध कर दिखाया था। राजा जनक ने बारह वर्षीय अष्‍टावक्रजी को अपने सिंहासन पर बैठाया और स्वयं उनके चरणों में बैठकर शिष्य-भाव से अपनी जिज्ञासाओं का शमन कराया। यही शंका-समाधान अष्‍टावक्र संवाद रूप में ‘अष्‍टावक्र गीता’ में समाहित है। ज्ञान-पिपासु एवं अध्यात्म-जिज्ञासु पाठकों के लिए एक श्रेष्‍ठ, पठनीय एवं संग्रहणीय आध्यात्मिक ग्रंथ।

Language: Hindi

Page No: 152

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

$15.67
Ashtavakra Gita By Swami Prakhar Pragyanand | The Supreme Truth Of Existence | Spiritual Bhagwad Book (Geeta) On Self-Realization Enlightenment-Swami Prakhar Pragyanand
$15.67

Product Information

Shipping & Returns

Description

Ashtavakra Gita By Swami Prakhar Pragyanand | The Supreme Truth Of Existence | Spiritual Bhagwad Book (Geeta) On Self-Realization Enlightenment-Swami Prakhar Pragyanand

About the Products:

अष्‍टावक्र गीता भारतीय पौराणिक साहित्य-भंडार में एक-से-एक अप्रतिम बहुमूल्य रत्‍न भरे पड़े हैं। अष्‍टावक्र गीता अध्यात्म का शिरोमणि ग्रंथ है। इसकी तुलना किसी अन्य ग्रंथ से नहीं की जा सकती। अष्‍टावक्रजी बुद्धपुरुष थे, जिनका नाम अध्यात्म-जगत् में आदर एवं सम्मान के साथ लिया जाता है। कहा जाता है कि जब वे अपनी माता के गर्भ में थे, उस समय उनके पिताजी वेद-पाठ कर रहे थे, तब उन्होंने गर्भ से ही पिता को टोक दिया था—‘शास्‍‍त्रों में ज्ञान कहाँ है? ज्ञान तो स्वयं के भीतर है! सत्य शास्‍‍त्रों में नहीं, स्वयं में है।’ यह सुनकर पिता ने गर्भस्थ शिशु को शाप दे दिया, ‘तू आठ अंगों से टेढ़ा-मेढ़ा एवं कुरूप होगा।’ इसीलिए उनका नाम ‘अष्‍टावक्र’ पड़ा। ‘अष्‍टावक्र गीता’ में अष्‍टावक्रजी के एक-से-एक अनूठे वक्‍तव्य हैं। ये कोई सैद्धांतिक वक्‍तव्य नहीं हैं, बल्कि प्रयोगसिद्ध वैज्ञानिक सत्य हैं, जिनको उन्हेंने विदेह जनक पर प्रयोग करके सत्य सिद्ध कर दिखाया था। राजा जनक ने बारह वर्षीय अष्‍टावक्रजी को अपने सिंहासन पर बैठाया और स्वयं उनके चरणों में बैठकर शिष्य-भाव से अपनी जिज्ञासाओं का शमन कराया। यही शंका-समाधान अष्‍टावक्र संवाद रूप में ‘अष्‍टावक्र गीता’ में समाहित है। ज्ञान-पिपासु एवं अध्यात्म-जिज्ञासु पाठकों के लिए एक श्रेष्‍ठ, पठनीय एवं संग्रहणीय आध्यात्मिक ग्रंथ।

Language: Hindi

Page No: 152

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

Ashtavakra Gita By Swami Prakhar Pragyanand | The Supreme Truth Of Existence | Spiritual Bhagwad Book (Geeta) On Self-Realization Enlightenment-Swami Prakhar Pragyanand | Dista