
Bachpan Se Jawani | Zindagi Ki Paheli Udan Novel Book-Tejas Pandey
Bachpan Se Jawani | Zindagi Ki Paheli Udan Novel Book-Tejas Pandey
About the Products:
बचपन से जवानी (जिंदगी की पहली उड़ान) में जिंदगी के कटु सत्य को भी फुलवारी में हो रहे क्रिकेट मैच के समानांतर रखकर उम्र और गुजरे जमाने का सामयिक तथा तुलनात्मक व्याख्यान है। घरपरिवार की कहानी उम्र और वक्त के साथ कैसे बदल जाती है और खून के रिश्तों में भी दूरियाँ आ जाती हैं। घर का मालिक रह चुका व्यक्ति अचानक हर जरूरत की चीजें माँगने पर मजबूर हो जाता है। बच्चों के खेलने के दिन गुजर जाते हैं; एक दिन वही बच्चे बड़े हो जाते हैं समय के साथ सब बदल जाता है। यह उपन्यास एक किशोर के ऊपर केंद्रित है, जिसका नाम बंसी है। बंसी के जीवन में प्राकृतिक एवं सामाजिक रोमांच के साथसाथ दुःखों की गठरियों का भी समायोजन है। उसकी दुःख की गठरियों में मुख्य रूप से साइकिल की चेन उतरने का दर्द प्रधान है। बाकी बाढ़ पीड़ितों के दर्द को आत्मसात् कर वह पराए दुःख को भी अपना निजी दुःख बना लेता है, जिसमें उसका मित्र मनोहर भी शामिल होता है। दुःखसुख और दुनिया की बेचैनियों से परे बंसी के हृदय में एक निश्चल प्रेमधारा उत्पन्न होती है। एक ऐसी युवती के लिए, जो ताँगे पर आनाजाना करती है। यह एक अधूरी कहानी है, जो अगली बार पूरी हो जाए शायद ! या फिर कभी भी नहीं।
Language: Hindi
Page No: 120
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
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Description
Bachpan Se Jawani | Zindagi Ki Paheli Udan Novel Book-Tejas Pandey
About the Products:
बचपन से जवानी (जिंदगी की पहली उड़ान) में जिंदगी के कटु सत्य को भी फुलवारी में हो रहे क्रिकेट मैच के समानांतर रखकर उम्र और गुजरे जमाने का सामयिक तथा तुलनात्मक व्याख्यान है। घरपरिवार की कहानी उम्र और वक्त के साथ कैसे बदल जाती है और खून के रिश्तों में भी दूरियाँ आ जाती हैं। घर का मालिक रह चुका व्यक्ति अचानक हर जरूरत की चीजें माँगने पर मजबूर हो जाता है। बच्चों के खेलने के दिन गुजर जाते हैं; एक दिन वही बच्चे बड़े हो जाते हैं समय के साथ सब बदल जाता है। यह उपन्यास एक किशोर के ऊपर केंद्रित है, जिसका नाम बंसी है। बंसी के जीवन में प्राकृतिक एवं सामाजिक रोमांच के साथसाथ दुःखों की गठरियों का भी समायोजन है। उसकी दुःख की गठरियों में मुख्य रूप से साइकिल की चेन उतरने का दर्द प्रधान है। बाकी बाढ़ पीड़ितों के दर्द को आत्मसात् कर वह पराए दुःख को भी अपना निजी दुःख बना लेता है, जिसमें उसका मित्र मनोहर भी शामिल होता है। दुःखसुख और दुनिया की बेचैनियों से परे बंसी के हृदय में एक निश्चल प्रेमधारा उत्पन्न होती है। एक ऐसी युवती के लिए, जो ताँगे पर आनाजाना करती है। यह एक अधूरी कहानी है, जो अगली बार पूरी हो जाए शायद ! या फिर कभी भी नहीं।
Language: Hindi
Page No: 120
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