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Barakhadi - Gyan Chaturvedi

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Barakhadi - Gyan Chaturvedi

Barakhadi - Gyan Chaturvedi

About The Product:

‘‘इक्कीसवीं सदी में समाज, रिश्ते, राजनीति, शिक्षाजगत, मीडिया, धर्म, संस्कृति और वैश्विक परिदृश्य इतना तेज़ी से बदला है कि आदमी बौखला गया है। इस सदी का नागरिक वो नहीं रहा जो वह बीसवीं शताब्दी में था। मेरे व्यंग्य के सामने एकदम अलग आदमी खड़ा है अब। इस आदमी और इस दुनिया को देखने-समझने के लिए हम अगर वही पुराने टूल्स इस्तेमाल करेंगे तो इसके जीवन में निहित विसंगतियों को उजागर करने वाला व्यंग्य नहीं पकड़ पायेंगे। मुझे बीसवीं सदी के लेखन का लंबा अनुभव ज़रूर था परंतु आज का समय अजनबी बनकर सामने खड़ा था और मेरी समझ साथ नहीं दे रही थी कि इसे कैसे समझूँ कि खुद को इस पर व्यंग्य लिखने के काबिल मान सकूँ! यह सदी चुनौती फेंक रही थी कि पहले मुझे ठीक से पहचान तो लो श्रीमान्। मैं आज भी डरता हूँ कि मेरा व्यंग्यकार इक्कीसवीं सदी की दुनिया को समझने में चूक तो नहीं रहा? और मेरा ही क्यों, समकालीन व्यंग्य पढ़कर लगता तो यही है कि हम सब कहीं-न-कहीं चूक रहे हैं। मेरा मत है कि व्यंग्यकार को इस सदी के विश्व पर कुछ नये ढंग का व्यंग्य लिखना होगा।’’ - इस पुस्तक की भूमिका से बाराखड़ी इस सदी की बदलती दुनिया पर सुपरिचित व्यंग्यकार ज्ञान चतुर्वेदी के 61 व्यंग्य-लेखों का संग्रह है, जिन्हें पढ़ते हुए पाठक मुस्कुराने के साथ सोचने पर भी मजबूर हो जायेगा।

Product Details:

  • Author: Gyan Chaturvedi
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 208
  • Publication Date: 2026

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

  • $6.15

    Original: $17.58

    -65%
    Barakhadi - Gyan Chaturvedi

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    Description

    Barakhadi - Gyan Chaturvedi

    About The Product:

    ‘‘इक्कीसवीं सदी में समाज, रिश्ते, राजनीति, शिक्षाजगत, मीडिया, धर्म, संस्कृति और वैश्विक परिदृश्य इतना तेज़ी से बदला है कि आदमी बौखला गया है। इस सदी का नागरिक वो नहीं रहा जो वह बीसवीं शताब्दी में था। मेरे व्यंग्य के सामने एकदम अलग आदमी खड़ा है अब। इस आदमी और इस दुनिया को देखने-समझने के लिए हम अगर वही पुराने टूल्स इस्तेमाल करेंगे तो इसके जीवन में निहित विसंगतियों को उजागर करने वाला व्यंग्य नहीं पकड़ पायेंगे। मुझे बीसवीं सदी के लेखन का लंबा अनुभव ज़रूर था परंतु आज का समय अजनबी बनकर सामने खड़ा था और मेरी समझ साथ नहीं दे रही थी कि इसे कैसे समझूँ कि खुद को इस पर व्यंग्य लिखने के काबिल मान सकूँ! यह सदी चुनौती फेंक रही थी कि पहले मुझे ठीक से पहचान तो लो श्रीमान्। मैं आज भी डरता हूँ कि मेरा व्यंग्यकार इक्कीसवीं सदी की दुनिया को समझने में चूक तो नहीं रहा? और मेरा ही क्यों, समकालीन व्यंग्य पढ़कर लगता तो यही है कि हम सब कहीं-न-कहीं चूक रहे हैं। मेरा मत है कि व्यंग्यकार को इस सदी के विश्व पर कुछ नये ढंग का व्यंग्य लिखना होगा।’’ - इस पुस्तक की भूमिका से बाराखड़ी इस सदी की बदलती दुनिया पर सुपरिचित व्यंग्यकार ज्ञान चतुर्वेदी के 61 व्यंग्य-लेखों का संग्रह है, जिन्हें पढ़ते हुए पाठक मुस्कुराने के साथ सोचने पर भी मजबूर हो जायेगा।

    Product Details:

  • Author: Gyan Chaturvedi
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 208
  • Publication Date: 2026

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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