
Beej Se Vriksha Tak | Inspirational Biography Of Ias G.S. Naveen Kumar-Dr. Jaswant Rai
Beej Se Vriksha Tak | Inspirational Biography Of Ias G.S. Naveen Kumar-Dr. Jaswant Rai
About the Products:
डॉ. जसवंत राय की प्रस्तुत पुस्तक 'बीज से वृक्ष तक' हर समस्या का समाधान सोचने वाले • IAS नवीन कुमार के जीवन पर आधारित एक प्रेरणादायक कहानी है। नवीन कुमार की साहित्य, समाज और संस्कृति के प्रति रुचि और आठों पहर ऊर्जा से भरे उनके स्वभाव की सहजता, सौहार्द, सरलता, संघर्ष, समर्पण और जिज्ञासा ने लेखक को उनके बचपन को खंगालने के लिए विवश कर दिया। इसमें निकला कि उनके बालमन पर उनकी माँ जी. विजया द्वारा तराशी गई सांस्कृतिक धरोहर, पिता गोपाला कृष्ण की ओर से उसे बड़ा सोचने और बड़ा आदमी बनने के लिए दिया गया मार्गदर्शन, घर-परिवार का वातावरण, अध्यापकों का प्रोत्साहन, रेलवे स्टेशन पर समाचार-पत्र बेचकर शिक्षा प्राप्त करने वाले और अंततः भारत के राष्ट्रपति के पद तक पहुँचने वाले डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के व्यक्तित्व के प्रभाव ने नवीन कुमार के लिए कलेक्टर बनने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्हें अपने चारों ओर डॉ. कलाम का आभामंडल अनुभव होने लगा। उनके हठी स्वभाव, निरंतर परिश्रम और अटूट लगन ने उन्हें उनकी IAS की मंजिल के पास पहुँचा दिया। एक साधारण परिवार से उठकर कलेक्टर और फिर उससे भी आगे की यात्रा कैसे की जा सकती है, यह इस पुस्तक में बखूबी देखने को मिलेगा। यह पुस्तक नवयुवकों के लिए मात्र उच्च स्तरीय परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने में ही लाभदायक नहीं होगी अपितु एक मानव में मानवता के गुणों को रोपित करने में भी सहायक होगी।
Language: Hindi
Page No: 176
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
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Beej Se Vriksha Tak | Inspirational Biography Of Ias G.S. Naveen Kumar-Dr. Jaswant Rai
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डॉ. जसवंत राय की प्रस्तुत पुस्तक 'बीज से वृक्ष तक' हर समस्या का समाधान सोचने वाले • IAS नवीन कुमार के जीवन पर आधारित एक प्रेरणादायक कहानी है। नवीन कुमार की साहित्य, समाज और संस्कृति के प्रति रुचि और आठों पहर ऊर्जा से भरे उनके स्वभाव की सहजता, सौहार्द, सरलता, संघर्ष, समर्पण और जिज्ञासा ने लेखक को उनके बचपन को खंगालने के लिए विवश कर दिया। इसमें निकला कि उनके बालमन पर उनकी माँ जी. विजया द्वारा तराशी गई सांस्कृतिक धरोहर, पिता गोपाला कृष्ण की ओर से उसे बड़ा सोचने और बड़ा आदमी बनने के लिए दिया गया मार्गदर्शन, घर-परिवार का वातावरण, अध्यापकों का प्रोत्साहन, रेलवे स्टेशन पर समाचार-पत्र बेचकर शिक्षा प्राप्त करने वाले और अंततः भारत के राष्ट्रपति के पद तक पहुँचने वाले डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के व्यक्तित्व के प्रभाव ने नवीन कुमार के लिए कलेक्टर बनने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्हें अपने चारों ओर डॉ. कलाम का आभामंडल अनुभव होने लगा। उनके हठी स्वभाव, निरंतर परिश्रम और अटूट लगन ने उन्हें उनकी IAS की मंजिल के पास पहुँचा दिया। एक साधारण परिवार से उठकर कलेक्टर और फिर उससे भी आगे की यात्रा कैसे की जा सकती है, यह इस पुस्तक में बखूबी देखने को मिलेगा। यह पुस्तक नवयुवकों के लिए मात्र उच्च स्तरीय परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने में ही लाभदायक नहीं होगी अपितु एक मानव में मानवता के गुणों को रोपित करने में भी सहायक होगी।
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