
Bimari Ko Kahen Na!-Dr. B. S. Johri
Bimari Ko Kahen Na!-Dr. B. S. Johri
About the Products:
एक ऐसी पुस्तक जो हर साधक को एक स्वस्थ, खुशहाल और अधिक प्रबुद्ध जीवन की ओर ले जाती है। 'बीमारी को कहें न!' आपको उस अनदेखी जगह को खोजने के लिए आमंत्रित करती है, जहाँ भावनाएँ संवेदनाएँ बन जाती हैं, और अंदरूनी टकराव चुपचाप शरीर को आकार देते हैं। यह हमें याद दिलाती है कि कई बीमारियाँ अंगों में नहीं, बल्कि डर, चोट, तनाव या अनकहे दर्द के पलों में शुरू होती हैं। असली अनुभवों को होम्योपैथी के कोमल स्पर्श के साथ मिलाकर यह पुस्तक बताती है कि कैसे जागरूकता दुःख को कम कर सकती है, कैसे समझ तनाव को खत्म कर सकती है, और कैसे मन को स्पष्टता मिलते ही शरीर ठीक होने लगता है। यह पाठकों को अपने अंदर देखने के लिए प्रोत्साहित करती है, ताकि वे उन पैटर्नी को पहचान सकें, जो उनकी शांति भंग करते हैं, उन कहानियों को पहचान सकें, जो उनके लक्षण बताने की कोशिश कर रही हैं, और उस शांत बुद्धि से फिर से जुड़ सकें, जो हर कोशिका को संतुलन की ओर ले जाती है। 'बीमारी को कहें न!' गहरे ज्ञान की तलाश करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए एक पक्का मित्र है। यह स्मरण करवाती है कि उपचार कोई बाहरी घटना नहीं है, बल्कि एक आंतरिक जागरण है। जब टकराव खत्म होते हैं, तो शरीर भी ठीक हो जाता है।
Language: Hindi
Page No: 144
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
Product Information
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Shipping & Returns
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Description
Bimari Ko Kahen Na!-Dr. B. S. Johri
About the Products:
एक ऐसी पुस्तक जो हर साधक को एक स्वस्थ, खुशहाल और अधिक प्रबुद्ध जीवन की ओर ले जाती है। 'बीमारी को कहें न!' आपको उस अनदेखी जगह को खोजने के लिए आमंत्रित करती है, जहाँ भावनाएँ संवेदनाएँ बन जाती हैं, और अंदरूनी टकराव चुपचाप शरीर को आकार देते हैं। यह हमें याद दिलाती है कि कई बीमारियाँ अंगों में नहीं, बल्कि डर, चोट, तनाव या अनकहे दर्द के पलों में शुरू होती हैं। असली अनुभवों को होम्योपैथी के कोमल स्पर्श के साथ मिलाकर यह पुस्तक बताती है कि कैसे जागरूकता दुःख को कम कर सकती है, कैसे समझ तनाव को खत्म कर सकती है, और कैसे मन को स्पष्टता मिलते ही शरीर ठीक होने लगता है। यह पाठकों को अपने अंदर देखने के लिए प्रोत्साहित करती है, ताकि वे उन पैटर्नी को पहचान सकें, जो उनकी शांति भंग करते हैं, उन कहानियों को पहचान सकें, जो उनके लक्षण बताने की कोशिश कर रही हैं, और उस शांत बुद्धि से फिर से जुड़ सकें, जो हर कोशिका को संतुलन की ओर ले जाती है। 'बीमारी को कहें न!' गहरे ज्ञान की तलाश करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए एक पक्का मित्र है। यह स्मरण करवाती है कि उपचार कोई बाहरी घटना नहीं है, बल्कि एक आंतरिक जागरण है। जब टकराव खत्म होते हैं, तो शरीर भी ठीक हो जाता है।
Language: Hindi
Page No: 144
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