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Chand Ke Sirhane Laltain - Irshad Khan 'Sikandar'

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Chand Ke Sirhane Laltain - Irshad Khan 'Sikandar'

Chand Ke Sirhane Laltain - Irshad Khan 'Sikandar'

About The Product:

8 अगस्त, 1983 को संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) के एक साधारण परिवार में जन्मे इरशाद ख़ान ‘सिकन्दर’ ने बहुत कम समय में उर्दू, हिन्दी, भोजपुरी के साहित्यिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में अपनी पुख़्ता पहचान बनायी है। एक आला दर्जे के शाइर, नाटककार और कहानीकार होने के अलावा उनके व्यक्तित्व के कई और भी कलात्मक रंग हैं। चाँद के सिरहाने लालटेन उनका नया ग़ज़ल-संग्रह है। इससे पूर्व आँसुओं का तर्जुमा और दूसरा इश्क़ दो ग़ज़ल-संग्रह एवं जौन एलिया का जिन, अमीरन उमराव अदा दो नाटक प्रकाशित हो चुके हैं। जिसमें से क्रमशः आँसुओं का तर्जुमा को 2020 में ‘अंतर्राष्ट्रीय शिवना कविता सम्मान’ एवं जौन एलिया का जिन  को 2024 में ‘स्वयं प्रकाश स्मृति सम्मान’ से नवाज़ा जा चुका है। इरशाद की शाइरी, परम्परा और आधुनिकता का अनूठा संगम है। उनकी सहज सरल संवाद शैली कभी प्रेम, विरह और दर्शन के विविध रूप दिखाती है तो कभी समय की आँखों में आँखें डालकर आगाह करती है। मुझको मजबूर न कीजेगा अदाकारी पर मैं जो किरदार में उतरा तो क़यामत होगी

Product Details:

  • Author: Irshad Khan 'Sikandar'
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 144
  • Publication Date: 2026
  • Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

    $5.00

    Original: $14.30

    -65%
    Chand Ke Sirhane Laltain - Irshad Khan 'Sikandar'

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    Description

    Chand Ke Sirhane Laltain - Irshad Khan 'Sikandar'

    About The Product:

    8 अगस्त, 1983 को संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) के एक साधारण परिवार में जन्मे इरशाद ख़ान ‘सिकन्दर’ ने बहुत कम समय में उर्दू, हिन्दी, भोजपुरी के साहित्यिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में अपनी पुख़्ता पहचान बनायी है। एक आला दर्जे के शाइर, नाटककार और कहानीकार होने के अलावा उनके व्यक्तित्व के कई और भी कलात्मक रंग हैं। चाँद के सिरहाने लालटेन उनका नया ग़ज़ल-संग्रह है। इससे पूर्व आँसुओं का तर्जुमा और दूसरा इश्क़ दो ग़ज़ल-संग्रह एवं जौन एलिया का जिन, अमीरन उमराव अदा दो नाटक प्रकाशित हो चुके हैं। जिसमें से क्रमशः आँसुओं का तर्जुमा को 2020 में ‘अंतर्राष्ट्रीय शिवना कविता सम्मान’ एवं जौन एलिया का जिन  को 2024 में ‘स्वयं प्रकाश स्मृति सम्मान’ से नवाज़ा जा चुका है। इरशाद की शाइरी, परम्परा और आधुनिकता का अनूठा संगम है। उनकी सहज सरल संवाद शैली कभी प्रेम, विरह और दर्शन के विविध रूप दिखाती है तो कभी समय की आँखों में आँखें डालकर आगाह करती है। मुझको मजबूर न कीजेगा अदाकारी पर मैं जो किरदार में उतरा तो क़यामत होगी

    Product Details:

  • Author: Irshad Khan 'Sikandar'
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 144
  • Publication Date: 2026
  • Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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