
Chhoti Si Baat | Dayre By Rangeya Ragahv | A Thought-Provoking Hindi Novel On Human Emotions, Society And Personal Struggles | Philosophical And Social Literature Book In Hindi-Rangeya Raghav
Chhoti Si Baat | Dayre By Rangeya Ragahv | A Thought-Provoking Hindi Novel On Human Emotions, Society And Personal Struggles | Philosophical And Social Literature Book In Hindi-Rangeya Raghav
About the Products:
छोटी सी बात उपन्यास एक सामान्य सी, लेकिन गहरे अर्थों से भरपूर कहानी है, जो मानवीय संवेदनाओं, समाज की वास्तविकताओं और व्यक्तिगत संघर्षों पर आधारित है। इस उपन्यास का नाम खुद में ही बहुत कुछ कहता है—यह बताता है कि कभी-कभी जीवन में सबसे छोटी सी बात, सबसे छोटे से पहलू में भी कोई गहरी सच्चाई छिपी होती है। दायरे उपन्यास राघव की गहरी सोच, समाज की सच्चाई और मानसिक संघर्षों को उजागर करने वाली कृति है। यह उपन्यास पाठकों को समाज, व्यक्तिगत अस्तित्व और आंतरिक संघर्ष के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। राघव ने इसे एक संवेदनशील और सामाजिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है, जिसमें व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान, समाज के प्रति उसके विचार और जीवन के संघर्षों को बारीकी से चित्रित किया गया है। यह उपन्यास एक गहरी दार्शनिकता और मानसिकता की ओर पाठक को ले जाता है, जिससे वह समाज की सच्चाई को समझ सके।
Language: Hindi
Page No: 176
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
Original: $16.77
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Chhoti Si Baat | Dayre By Rangeya Ragahv | A Thought-Provoking Hindi Novel On Human Emotions, Society And Personal Struggles | Philosophical And Social Literature Book In Hindi-Rangeya Raghav
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छोटी सी बात उपन्यास एक सामान्य सी, लेकिन गहरे अर्थों से भरपूर कहानी है, जो मानवीय संवेदनाओं, समाज की वास्तविकताओं और व्यक्तिगत संघर्षों पर आधारित है। इस उपन्यास का नाम खुद में ही बहुत कुछ कहता है—यह बताता है कि कभी-कभी जीवन में सबसे छोटी सी बात, सबसे छोटे से पहलू में भी कोई गहरी सच्चाई छिपी होती है। दायरे उपन्यास राघव की गहरी सोच, समाज की सच्चाई और मानसिक संघर्षों को उजागर करने वाली कृति है। यह उपन्यास पाठकों को समाज, व्यक्तिगत अस्तित्व और आंतरिक संघर्ष के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। राघव ने इसे एक संवेदनशील और सामाजिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है, जिसमें व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान, समाज के प्रति उसके विचार और जीवन के संघर्षों को बारीकी से चित्रित किया गया है। यह उपन्यास एक गहरी दार्शनिकता और मानसिकता की ओर पाठक को ले जाता है, जिससे वह समाज की सच्चाई को समझ सके।
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Page No: 176
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