

Congress House - Ashar Najmi
Congress House - Ashar Najmi
About The Product:
‘‘यह कोई राजनीतिक उपन्यास नहीं है। यह उपन्यास एक शहर, बल्कि पूरे देश, यहाँ तक कि पूरी दुनिया के जंगल बनने की प्रक्रिया को बड़ी निर्दयता से प्रदर्शित करता है। जंगल का राजा कौन है, शेर या स्वयं जंगल? क्या जंगल और शेर एक-दूसरे से जंग लड़ रहे हैं? ये बुनियादी सवाल इस उपन्यास के केंद्रीय विचार में महत्त्व रखते हैं। यही सवाल उपन्यास को स्थानीय से सार्वभौमिक स्तर तक ले जाते हैं। इस उपन्यास के सभी पात्र, मुंबई की गलियाँ, अदालत, सांप्रदायिक दंगे, वेश्या, कॉल-गर्ल, ऐतिहासिक घटनाएँ, कांग्रेस हाउस बिल्डिंग और एनबी कंपाउंड आदि, ये सब प्रतीकों की श्रृँखला हैं, जो अस्तित्वगत और सामूहिक स्तर पर राजनीति और धर्म के पीछे छिपे क्रूर तंत्र की गवाही देते हैं। कांग्रेस हाउस हमें इस बात के लिए चेताता है कि सच्चाई का कोई एक चेहरा नहीं होता। इसके हर चेहरे के पीछे एक और चेहरा है, हर बयान के पीछे एक और ख़ामोशी है, और हर पात्र के पीछे एक प्रतीक छिपा हुआ है।’’ - इस पुस्तक में से अशअर नज्मी उर्दू के सुपरिचित लेखक हैं। 2021 में प्रकाशित इनके उपन्यास उसने कहा था को उर्दू का पहला पोस्टमाॅडर्न उपन्यास माना जाता है। सिफ़र की तौहीन, जोकर और कांग्रेस हाउस इनके अन्य उर्दू के उपन्यास हैं। इसके अतिरिक्त उर्दू लघुकथा-संग्रह भी प्रकाशित है। पिछले दो दशकों से वे भारतीय टेलीविज़न इंडस्ट्री से जुड़े हुए हंै, जहाँ उन्होंने कई टीवी धारावाहिक लिखे हैं। 2008 से वे एक उर्दू साहित्यिक पत्रिका इस्मत के सम्पादक पद पर कार्यरत हैं। वे मुम्बई में रहते हैं।
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Congress House - Ashar Najmi
About The Product:
‘‘यह कोई राजनीतिक उपन्यास नहीं है। यह उपन्यास एक शहर, बल्कि पूरे देश, यहाँ तक कि पूरी दुनिया के जंगल बनने की प्रक्रिया को बड़ी निर्दयता से प्रदर्शित करता है। जंगल का राजा कौन है, शेर या स्वयं जंगल? क्या जंगल और शेर एक-दूसरे से जंग लड़ रहे हैं? ये बुनियादी सवाल इस उपन्यास के केंद्रीय विचार में महत्त्व रखते हैं। यही सवाल उपन्यास को स्थानीय से सार्वभौमिक स्तर तक ले जाते हैं। इस उपन्यास के सभी पात्र, मुंबई की गलियाँ, अदालत, सांप्रदायिक दंगे, वेश्या, कॉल-गर्ल, ऐतिहासिक घटनाएँ, कांग्रेस हाउस बिल्डिंग और एनबी कंपाउंड आदि, ये सब प्रतीकों की श्रृँखला हैं, जो अस्तित्वगत और सामूहिक स्तर पर राजनीति और धर्म के पीछे छिपे क्रूर तंत्र की गवाही देते हैं। कांग्रेस हाउस हमें इस बात के लिए चेताता है कि सच्चाई का कोई एक चेहरा नहीं होता। इसके हर चेहरे के पीछे एक और चेहरा है, हर बयान के पीछे एक और ख़ामोशी है, और हर पात्र के पीछे एक प्रतीक छिपा हुआ है।’’ - इस पुस्तक में से अशअर नज्मी उर्दू के सुपरिचित लेखक हैं। 2021 में प्रकाशित इनके उपन्यास उसने कहा था को उर्दू का पहला पोस्टमाॅडर्न उपन्यास माना जाता है। सिफ़र की तौहीन, जोकर और कांग्रेस हाउस इनके अन्य उर्दू के उपन्यास हैं। इसके अतिरिक्त उर्दू लघुकथा-संग्रह भी प्रकाशित है। पिछले दो दशकों से वे भारतीय टेलीविज़न इंडस्ट्री से जुड़े हुए हंै, जहाँ उन्होंने कई टीवी धारावाहिक लिखे हैं। 2008 से वे एक उर्दू साहित्यिक पत्रिका इस्मत के सम्पादक पद पर कार्यरत हैं। वे मुम्बई में रहते हैं।
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