
Daroga Se Dcp: L.N. Rao-L.N. Rao::Shri Sanjeev Chauhan
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About the Products:
दारोगा से DCP: एल.एन. राव' आँख को चुभते चटकीले रंगों से रँगी-पुती एक अदना सी किताब भर नहीं है। यह तो कालांतर के (1960-1970) बेहद पिछड़े गाँव के एक उस ठेठ देहाती कहिए या फिर उस अल्लहड़ मासूम बालक 'लच्छू' की बेबाक मुँहजुबानी-सच्ची कहानी है, बीते वक्त में जिसके मासूम बचपन ने आँखों में सुनहरे सपनों की जगह देखी थी तो सिर्फ और सिर्फ, दो वक्त की रोटी पाने की बेरहम-बेकाबू 'ललक' या कहिए 'भूख', जिसने देखा था बेहया मजबूरियों के चंगुल में फँसे अपने भविष्य को हर कदम पर दम तोड़ते हुए, यह बेलाग लपेट 'आपबीती' है उस मासूम की, जो तमाम दुश्वारियों से जूझता हुआ दारोगा से DCP बना। आज विपरीत वक्त और हालातों की दुहाई देकर टूटकर बिखर जाने वाले युवाओं की प्रेरणास्त्रोत है 'दारोगा से DCP: एल.एन. राव' की यह कहानी, जिसके पाँवों में अगर गरीबी-गुरबत की बेड़ियों के बंधन थे, तो उन बंधनों को भी बीते कल के इसी जुझारू बालक लच्छू ने ही काटने की कुव्वत भी तो की, कालांतर का वही ठेठ देहाती अल्लहड़ बच्चा, हवा के विपरीत भी दौड़ता हुआ आखिर कैसे पा सका मंजिल को ? इन्हीं सौ-सौ सवालों का जवाब ही तो है इस वक्त आपके हाथों में, आपके सामने मौजूद 'दारोगा से DCP: एल.एन. राव'।
Language: Hindi
Page No: 224
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
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Daroga Se Dcp: L.N. Rao-L.N. Rao::Shri Sanjeev Chauhan
About the Products:
दारोगा से DCP: एल.एन. राव' आँख को चुभते चटकीले रंगों से रँगी-पुती एक अदना सी किताब भर नहीं है। यह तो कालांतर के (1960-1970) बेहद पिछड़े गाँव के एक उस ठेठ देहाती कहिए या फिर उस अल्लहड़ मासूम बालक 'लच्छू' की बेबाक मुँहजुबानी-सच्ची कहानी है, बीते वक्त में जिसके मासूम बचपन ने आँखों में सुनहरे सपनों की जगह देखी थी तो सिर्फ और सिर्फ, दो वक्त की रोटी पाने की बेरहम-बेकाबू 'ललक' या कहिए 'भूख', जिसने देखा था बेहया मजबूरियों के चंगुल में फँसे अपने भविष्य को हर कदम पर दम तोड़ते हुए, यह बेलाग लपेट 'आपबीती' है उस मासूम की, जो तमाम दुश्वारियों से जूझता हुआ दारोगा से DCP बना। आज विपरीत वक्त और हालातों की दुहाई देकर टूटकर बिखर जाने वाले युवाओं की प्रेरणास्त्रोत है 'दारोगा से DCP: एल.एन. राव' की यह कहानी, जिसके पाँवों में अगर गरीबी-गुरबत की बेड़ियों के बंधन थे, तो उन बंधनों को भी बीते कल के इसी जुझारू बालक लच्छू ने ही काटने की कुव्वत भी तो की, कालांतर का वही ठेठ देहाती अल्लहड़ बच्चा, हवा के विपरीत भी दौड़ता हुआ आखिर कैसे पा सका मंजिल को ? इन्हीं सौ-सौ सवालों का जवाब ही तो है इस वक्त आपके हाथों में, आपके सामने मौजूद 'दारोगा से DCP: एल.एन. राव'।
Language: Hindi
Page No: 224
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