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Dr. Ram Manohar Lohia : Drishti, Sankalp, Karma-Dr. Shribhagwan Singh

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Dr. Ram Manohar Lohia : Drishti, Sankalp, Karma-Dr. Shribhagwan Singh

Dr. Ram Manohar Lohia : Drishti, Sankalp, Karma-Dr. Shribhagwan Singh

About the Products:

राममनोहर लोहिया तो विद्यार्थी-जीवन को समाप्त कर गृहस्थ जीवन के प्रथम चरण में ही देशसेवा में जुट गए। परिवार बसाने के लिए विवाह भी नहीं किया। ऐसा विचार उनकी मृत्यु के बाद हिंदुस्तानी लोगों के दिल और दिमाग पर अमिट छाप के रूप में अंकित हो चुका है। पर इसका अंदाजा डॉ. लोहिया ने पहले ही लगा लिया था, इसीलिए उन्होंने कहा भी था, लोग मेरी बात सुनेंगे, शायद मेरे मरने के बाद, लेकिन किसी दिन सुनेंगे जरूर। प्रस्तुत पुस्तक के आठ अध्याय हैं, जो लोहिया के कार्य और विचारों का विश्लेषण करते हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया आधुनिक भारत के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक बदलाव के आधार शिल्पी हैं; आधुनिक भारत के मौलिक चिंतक और विचारक हैं। उनके अंदर अद्भुत, असीमित प्रतिभा थी। उनका हृदय बहुत ही कोमल और स्नेहमय था। वे भारत के एक ऐसे राजनेता हुए हैं, जो वचन और कर्म के बीच समन्वय स्थापित कर पाए। उनके अंदर ज्ञान, भक्ति और कर्म का अद्भुत मेल था। वे एक संपूर्ण व्यक्तित्व थे। इस संपूर्णता के लिए उन्होंने भारतमाता से तीन महान् विभूतियों-राम, कृष्ण और शिव के महान् गुणों को माँगा था, जो उन्हें भारतमाता से वरदान के रूप में मिला भी था।

Language: Hindi

Page No: 184

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

$19.86
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About the Products:

राममनोहर लोहिया तो विद्यार्थी-जीवन को समाप्त कर गृहस्थ जीवन के प्रथम चरण में ही देशसेवा में जुट गए। परिवार बसाने के लिए विवाह भी नहीं किया। ऐसा विचार उनकी मृत्यु के बाद हिंदुस्तानी लोगों के दिल और दिमाग पर अमिट छाप के रूप में अंकित हो चुका है। पर इसका अंदाजा डॉ. लोहिया ने पहले ही लगा लिया था, इसीलिए उन्होंने कहा भी था, लोग मेरी बात सुनेंगे, शायद मेरे मरने के बाद, लेकिन किसी दिन सुनेंगे जरूर। प्रस्तुत पुस्तक के आठ अध्याय हैं, जो लोहिया के कार्य और विचारों का विश्लेषण करते हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया आधुनिक भारत के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक बदलाव के आधार शिल्पी हैं; आधुनिक भारत के मौलिक चिंतक और विचारक हैं। उनके अंदर अद्भुत, असीमित प्रतिभा थी। उनका हृदय बहुत ही कोमल और स्नेहमय था। वे भारत के एक ऐसे राजनेता हुए हैं, जो वचन और कर्म के बीच समन्वय स्थापित कर पाए। उनके अंदर ज्ञान, भक्ति और कर्म का अद्भुत मेल था। वे एक संपूर्ण व्यक्तित्व थे। इस संपूर्णता के लिए उन्होंने भारतमाता से तीन महान् विभूतियों-राम, कृष्ण और शिव के महान् गुणों को माँगा था, जो उन्हें भारतमाता से वरदान के रूप में मिला भी था।

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