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Ek Zid Yah Bhi Stories Book-Pragati Gupta

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Ek Zid Yah Bhi Stories Book-Pragati Gupta

Ek Zid Yah Bhi Stories Book-Pragati Gupta

About the Products:

जीवन यात्रा का 'पहिया' मनुष्य को बहुत से अच्छे-बुरे अनुभव कराता है। कभी 'उसका आना' आपकी सोच को सकारात्मक विस्तार दे जाता है। कभी 'जो सोचा, वह कब हुआ' जैसी बातें 'क्या सही और क्या गलत' जैसे आकलन करवाकर हमारे वैचारिक स्तर को व्यापक कर देते हैं। कभी 'च्यों' जैसे प्रश्न जीवन के 'शह और मात' जैसे खेल की ओर इंगित करके खेली जाने वाली उस 'राजनीति' की ओर भी धकेलकर ले जाते हैं, जहाँ व्यक्ति 'नित नए खेल' खेल रहा है। एक सतत कर्मठ व्यक्ति 'है यह कैसी डगर' जैसे वाक्यांश का अन्वेषण कर अपने मन में 'एक जिद यह भी' को ठानकर हर संघर्ष से जूझता है। जीवन यात्रा के इसी क्रम में कहीं-न-कहीं 'इसको क्या कहेंगे' जैसी बातें समाज और परिवार की मानसिकता पर पुनः प्रश्न लगाकर बहुत कुछ विचारने पर विवश करती हैं। कभी ईश्वर का भेजा हुआ माध्यम आपको सचेत भी करता है। अंततः हमें कभी-कभी यह स्वीकारना भी पड़ता है कि सबके अपने-अपने निमित्त कर्मों का यह जीवन एक ब्योरा है। यह भी परम सत्य है कि 'बिछड़ेंगे सभी बारी-बारी', पर हमारी यात्राएँ अनवरत चलती रहनी चाहिए। कुछ ऐसी यात्राएँ भी, जो हमें अपने प्रारब्ध की ओर सचेत करें।

Language: Hindi

Page No: 136

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

$5.55

Original: $15.85

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About the Products:

जीवन यात्रा का 'पहिया' मनुष्य को बहुत से अच्छे-बुरे अनुभव कराता है। कभी 'उसका आना' आपकी सोच को सकारात्मक विस्तार दे जाता है। कभी 'जो सोचा, वह कब हुआ' जैसी बातें 'क्या सही और क्या गलत' जैसे आकलन करवाकर हमारे वैचारिक स्तर को व्यापक कर देते हैं। कभी 'च्यों' जैसे प्रश्न जीवन के 'शह और मात' जैसे खेल की ओर इंगित करके खेली जाने वाली उस 'राजनीति' की ओर भी धकेलकर ले जाते हैं, जहाँ व्यक्ति 'नित नए खेल' खेल रहा है। एक सतत कर्मठ व्यक्ति 'है यह कैसी डगर' जैसे वाक्यांश का अन्वेषण कर अपने मन में 'एक जिद यह भी' को ठानकर हर संघर्ष से जूझता है। जीवन यात्रा के इसी क्रम में कहीं-न-कहीं 'इसको क्या कहेंगे' जैसी बातें समाज और परिवार की मानसिकता पर पुनः प्रश्न लगाकर बहुत कुछ विचारने पर विवश करती हैं। कभी ईश्वर का भेजा हुआ माध्यम आपको सचेत भी करता है। अंततः हमें कभी-कभी यह स्वीकारना भी पड़ता है कि सबके अपने-अपने निमित्त कर्मों का यह जीवन एक ब्योरा है। यह भी परम सत्य है कि 'बिछड़ेंगे सभी बारी-बारी', पर हमारी यात्राएँ अनवरत चलती रहनी चाहिए। कुछ ऐसी यात्राएँ भी, जो हमें अपने प्रारब्ध की ओर सचेत करें।

Language: Hindi

Page No: 136

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