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Garda Ud Gaeel-Aaku Shrivastava

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Garda Ud Gaeel-Aaku Shrivastava

Garda Ud Gaeel-Aaku Shrivastava

About the Products:

यह देश चुनावों को पर्व की तरह मनाता रहा है। कोई भी चुनाव हो, उसे नागरिकों, वोटरों, जिनका वोट से लेना-देना हो या नहीं हो और चुनाव लड़ने-लड़ाने वाले मतदाताओं में अतिरिक्त ऊर्जा भर देता है। सब जतन समा जाते हैं। जिसका लेना-देना होता है, उसे लोकतंत्र याद आता है और जिसका नहीं भी होता है, उसे उसके विपरीत भाव स्मरण होते हैं। इस पुस्तक को आठ हिस्सों में बाँटा गया है। प्रमुख लेख के अलावा मुद्दों की वापसी की चर्चा के अतिरिक्त समीकरणों, बिहार के प्रमुख दलों (राष्ट्रीय दलों के अतिरिक्त, क्योंकि वहाँ बहुत कुछ दिल्ली के स्तर पर ही होता है और काफी छपता भी रहता है), घोषणा-पत्र, सोशल मीडिया के प्रभाव, बिहार के इतिहास और आजादी से पहले और बाद में गठबंधन की राजनीति के अलावा आँकड़ों पर बहुत कुछ है। तमाम कोशिशों के बाद यह कहना ठीक नहीं होगा कि मैं बिहार की राजनीति और इस चुनाव के सभी पक्षों को समेट सका। इस पुस्तक में बिहार के स्वर्णिम इतिहास से लेकर बिहार के विभाजन की त्रासदी और चुनावों के दौरान उठाए गए तमाम मुद्दों पर भी चर्चा है। पर यह लगता है कि यह पुस्तक भविष्य में एक संदर्भपुस्तक के रूप में काम कर सकती है।

Language: Hindi

Page No: 304

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

$25.68
Garda Ud Gaeel-Aaku Shrivastava
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Description

Garda Ud Gaeel-Aaku Shrivastava

About the Products:

यह देश चुनावों को पर्व की तरह मनाता रहा है। कोई भी चुनाव हो, उसे नागरिकों, वोटरों, जिनका वोट से लेना-देना हो या नहीं हो और चुनाव लड़ने-लड़ाने वाले मतदाताओं में अतिरिक्त ऊर्जा भर देता है। सब जतन समा जाते हैं। जिसका लेना-देना होता है, उसे लोकतंत्र याद आता है और जिसका नहीं भी होता है, उसे उसके विपरीत भाव स्मरण होते हैं। इस पुस्तक को आठ हिस्सों में बाँटा गया है। प्रमुख लेख के अलावा मुद्दों की वापसी की चर्चा के अतिरिक्त समीकरणों, बिहार के प्रमुख दलों (राष्ट्रीय दलों के अतिरिक्त, क्योंकि वहाँ बहुत कुछ दिल्ली के स्तर पर ही होता है और काफी छपता भी रहता है), घोषणा-पत्र, सोशल मीडिया के प्रभाव, बिहार के इतिहास और आजादी से पहले और बाद में गठबंधन की राजनीति के अलावा आँकड़ों पर बहुत कुछ है। तमाम कोशिशों के बाद यह कहना ठीक नहीं होगा कि मैं बिहार की राजनीति और इस चुनाव के सभी पक्षों को समेट सका। इस पुस्तक में बिहार के स्वर्णिम इतिहास से लेकर बिहार के विभाजन की त्रासदी और चुनावों के दौरान उठाए गए तमाम मुद्दों पर भी चर्चा है। पर यह लगता है कि यह पुस्तक भविष्य में एक संदर्भपुस्तक के रूप में काम कर सकती है।

Language: Hindi

Page No: 304

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

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