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Gramophone Qawwali - Suman Mishra

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Gramophone Qawwali - Suman Mishra

Gramophone Qawwali - Suman Mishra

About The Product:

"ग्रामोफ़ोन क़व्वाली" किताब में क़व्वालों द्वारा ग्रामोफ़ोन में रिकॉर्ड कराई गई क़व्वालियों को एक जगह जमा किया गया है। क़व्वाली पसंद करने वाले लोगों के लिए ये एक नायाब तोहफ़ा है। इन क़व्वालियों में हम्द, ना'त, मंकबत, ग़ज़ल, भजन, ठुमरी, दादरा आदि विधाएँ शामिल हैं। इसमें आप ग्रामोफ़ोन क़व्वाली के प्रचलित क़व्वालों द्वारा पढ़े गए सैकड़ों कलाम को सही मत्न के साथ पढ़ सकते हैं। सुमन मिश्र 14 अगस्त 1982, बड़हिया, लखीसराय (बिहार) में जन्मे सुमन मिश्र सूफ़ीवाद के गंभीर अध्येता और कवि हैं। वह समय-समय पर भिन्न-भिन्न ज्ञान-अनुशासनों में सक्रिय रहे हैं, इसमें संगीत का भी एक पक्ष है। यह ध्यान देने योग्य है कि इन सभी स्रोतों ने सूफ़ीवाद के उनके अध्ययन को एक दुर्लभ मौलिकता दी है। उनका काम-काज कुछ प्रतिष्ठित प्रकाशन-स्थलों में प्रकाशित हो चुका है। वह रेख़्ता फ़ाउंडेशन के उपक्रम ‘सूफ़ीनामा’ से संबद्ध हैं। सूफ़ियों के संसार से संबंधित उनकी कुछ किताबें प्रकाशनाधीन हैं और कुछ पर वे काम कर रहे हैं।

Product Details:

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 420
  • Publication Date: 2023
  • Legal Disclaimer : Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

    $5.35

    Original: $15.30

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    Gramophone Qawwali - Suman Mishra

    About The Product:

    "ग्रामोफ़ोन क़व्वाली" किताब में क़व्वालों द्वारा ग्रामोफ़ोन में रिकॉर्ड कराई गई क़व्वालियों को एक जगह जमा किया गया है। क़व्वाली पसंद करने वाले लोगों के लिए ये एक नायाब तोहफ़ा है। इन क़व्वालियों में हम्द, ना'त, मंकबत, ग़ज़ल, भजन, ठुमरी, दादरा आदि विधाएँ शामिल हैं। इसमें आप ग्रामोफ़ोन क़व्वाली के प्रचलित क़व्वालों द्वारा पढ़े गए सैकड़ों कलाम को सही मत्न के साथ पढ़ सकते हैं। सुमन मिश्र 14 अगस्त 1982, बड़हिया, लखीसराय (बिहार) में जन्मे सुमन मिश्र सूफ़ीवाद के गंभीर अध्येता और कवि हैं। वह समय-समय पर भिन्न-भिन्न ज्ञान-अनुशासनों में सक्रिय रहे हैं, इसमें संगीत का भी एक पक्ष है। यह ध्यान देने योग्य है कि इन सभी स्रोतों ने सूफ़ीवाद के उनके अध्ययन को एक दुर्लभ मौलिकता दी है। उनका काम-काज कुछ प्रतिष्ठित प्रकाशन-स्थलों में प्रकाशित हो चुका है। वह रेख़्ता फ़ाउंडेशन के उपक्रम ‘सूफ़ीनामा’ से संबद्ध हैं। सूफ़ियों के संसार से संबंधित उनकी कुछ किताबें प्रकाशनाधीन हैं और कुछ पर वे काम कर रहे हैं।

    Product Details:

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 420
  • Publication Date: 2023
  • Legal Disclaimer : Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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