
Hajoor Aaman - Shabbir Ahmad
Hajoor Aaman - Shabbir Ahmad
About The Product:
हजूर आमा भादी समाज के अफ़राद की सूरत-ए-हाल को पेश करता है। इस नॉवेल में सियासी, समाजी, तारीख़ी और तहज़ीबी हवालों से भी वाक़ियात क़लमबन्द किए गए हैं, जिसमें देबलीना की दास्तान-ए-इश्क़, भादी समाज की तवह्हुम-परस्ती, शुमाली बंगाल में गोरखा लैंड तहरीक के हालात को बुनियाद बनाया गया है। नॉवेल का उस्लूब-ए-बयान रवाँ है जिसमें myth और इज्तिमाई लाशऊर कारफ़रमा हैं। अपनी ज़बान-ओ-बयान के ऐतबार से नॉवेल में readability की सिफ़त मौजूद है।
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Hajoor Aaman - Shabbir Ahmad
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हजूर आमा भादी समाज के अफ़राद की सूरत-ए-हाल को पेश करता है। इस नॉवेल में सियासी, समाजी, तारीख़ी और तहज़ीबी हवालों से भी वाक़ियात क़लमबन्द किए गए हैं, जिसमें देबलीना की दास्तान-ए-इश्क़, भादी समाज की तवह्हुम-परस्ती, शुमाली बंगाल में गोरखा लैंड तहरीक के हालात को बुनियाद बनाया गया है। नॉवेल का उस्लूब-ए-बयान रवाँ है जिसमें myth और इज्तिमाई लाशऊर कारफ़रमा हैं। अपनी ज़बान-ओ-बयान के ऐतबार से नॉवेल में readability की सिफ़त मौजूद है।
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