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Hatheli Par Karn - Narendra Nagdeve

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Hatheli Par Karn - Narendra Nagdeve

Hatheli Par Karn - Narendra Nagdeve

About The Product:

‘महाभारत’ के महानायक कर्ण का नाम आते ही आँखों के आगे परस्पर विरोधी बिम्ब उभर आते हैं - एक कर्ण दान-पुण्य के शिखर पर है, जो इंद्र को अपने कवच-कुंडल तक दान कर देता है, तो दूसरा कर्ण दुर्योधन के दरबार में चीरहरण के घृणित कृत्य में सहभागी है। उपन्यास का नैरेटर कर्ण का बालसखा और शुभचिंतक है। उसके सूत पुत्र होने के अपमानों का गवाह भी, और विलक्षण धनुर्धर में विकसित होने का साक्षी भी। वह महज़ उसकी जीवनी को प्रस्तुत नहीं कर रहा, बल्कि बार-बार उसके उच्च आदर्शों से स्खलित होकर पतन के गर्त में गिरने की यातनाओं को स्वयं अपने अंतर्मन पर झेल रहा है। कर्ण अपने जीवन में एक साथ पाप और पुण्य दोनों को बेधड़क जीता चलता है, जब तक कि उसकी मृत्युशैय्या पर स्वयं श्रीकृष्ण के सामने यह तय करने की ज़िम्मेदारी नहीं आ जाती कि दोनों में से किसका पलड़ा भारी रहा? हथेली पर कर्ण विशिष्ट कथाकार उपन्यासकार नगेन्द्र नागदेव का छठा उपन्यास है। अभी तक उनके पाँच उपन्यास और दस से अधिक कहानी-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी कई पुस्तकें अंग्रेज़ी, मराठी और उड़िया में अनुदित हो चुकी हैं। इन्हें दिल्ली हिन्दी साहित्य अकादेमी के ‘साहित्य सम्मान’ और मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् के ‘कृति पुरस्कार’ सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हैं। व्यवसाय से नगेन्द्र नागदेव एक आर्किटेक्चर हैं।

Product Details:

  • Author: Narendra Nagdeve
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 176
  • Publication Date: 2026

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

  • $5.33

    Original: $15.22

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    Description

    Hatheli Par Karn - Narendra Nagdeve

    About The Product:

    ‘महाभारत’ के महानायक कर्ण का नाम आते ही आँखों के आगे परस्पर विरोधी बिम्ब उभर आते हैं - एक कर्ण दान-पुण्य के शिखर पर है, जो इंद्र को अपने कवच-कुंडल तक दान कर देता है, तो दूसरा कर्ण दुर्योधन के दरबार में चीरहरण के घृणित कृत्य में सहभागी है। उपन्यास का नैरेटर कर्ण का बालसखा और शुभचिंतक है। उसके सूत पुत्र होने के अपमानों का गवाह भी, और विलक्षण धनुर्धर में विकसित होने का साक्षी भी। वह महज़ उसकी जीवनी को प्रस्तुत नहीं कर रहा, बल्कि बार-बार उसके उच्च आदर्शों से स्खलित होकर पतन के गर्त में गिरने की यातनाओं को स्वयं अपने अंतर्मन पर झेल रहा है। कर्ण अपने जीवन में एक साथ पाप और पुण्य दोनों को बेधड़क जीता चलता है, जब तक कि उसकी मृत्युशैय्या पर स्वयं श्रीकृष्ण के सामने यह तय करने की ज़िम्मेदारी नहीं आ जाती कि दोनों में से किसका पलड़ा भारी रहा? हथेली पर कर्ण विशिष्ट कथाकार उपन्यासकार नगेन्द्र नागदेव का छठा उपन्यास है। अभी तक उनके पाँच उपन्यास और दस से अधिक कहानी-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी कई पुस्तकें अंग्रेज़ी, मराठी और उड़िया में अनुदित हो चुकी हैं। इन्हें दिल्ली हिन्दी साहित्य अकादेमी के ‘साहित्य सम्मान’ और मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् के ‘कृति पुरस्कार’ सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हैं। व्यवसाय से नगेन्द्र नागदेव एक आर्किटेक्चर हैं।

    Product Details:

  • Author: Narendra Nagdeve
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 176
  • Publication Date: 2026

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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