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Josh, Jazba Aur Junoon जोश, जज्बा और जुनून | Hindi Version Of Soldiering On | Ambreen Zaidi-Ambreen Zaidi

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Josh, Jazba Aur Junoon जोश, जज्बा और जुनून | Hindi Version Of Soldiering On | Ambreen Zaidi-Ambreen Zaidi

Josh, Jazba Aur Junoon जोश, जज्बा और जुनून | Hindi Version Of Soldiering On | Ambreen Zaidi-Ambreen Zaidi

About the Products:

यह पुस्तक कई कारणों से विशेष महत्त्व रखती है। हमारे देश के नागरिकों में ड्यूटी के दौरान घायल हुए और अपने अंग गँवाने वाले सैनिकों के बलिदान तथा उनकी चुनौतियों के बारे में जागरूकता की कमी है। साथ ही ऐसे दिव्यांग सैनिकों की सहायता के लिए एक व्यापक नीतिगत ढाँचे का भी अभाव है । इस कारण उन्हें दिव्यांगता का लाभ प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है, जिसके वे हकदार हैं। लेखिका अपनी शोध-यात्रा में जब एक शहर से दूसरे शहर तक गईं और इन साहसी सैनिकों से मिली तो उन्हें अहसास हुआ कि हमारे बीच ऐसी कई अज्ञात और गुमनाम हस्तियाँ हैं, जिनकी कहानी अब तक किसी ने नहीं सुनी है। अपनी शारीरिक सीमाओं और जीवन भर के मानसिक सदमे के बावजूद प्रेरणा के प्रतीक के रूप में खड़े हैं। उनकी देशभक्ति अटल है और उनमें अद्भुत दृढ़ संकल्प दिखता है, जो अपने देश की सुरक्षा व सम्मान के लिए किसी भी सक्षम शरीर वाले से टकराने का दम रखते हैं। इस पुस्तक के माध्यम से लेखिका का इरादा इन सम्मानित लोगों के प्रति उदासीनता की ओर ध्यान खींचना और अधिकारियों से उनकी जरूरतों को पूरा करने का आग्रह करना है। दिव्यांगता बस मन में रहती है, इस मंत्र को उनमें से प्रत्येक ने दोहराया है। यह पुस्तक उन जीवट सैनिकों, भारतमाता के सच्चे सपूतों और राष्ट्र के प्रति उनकी उल्लेखनीय भक्ति को विनम्र श्रद्धांजलि है।

Language: Hindi

Page No: 216

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

$18.76
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Description

Josh, Jazba Aur Junoon जोश, जज्बा और जुनून | Hindi Version Of Soldiering On | Ambreen Zaidi-Ambreen Zaidi

About the Products:

यह पुस्तक कई कारणों से विशेष महत्त्व रखती है। हमारे देश के नागरिकों में ड्यूटी के दौरान घायल हुए और अपने अंग गँवाने वाले सैनिकों के बलिदान तथा उनकी चुनौतियों के बारे में जागरूकता की कमी है। साथ ही ऐसे दिव्यांग सैनिकों की सहायता के लिए एक व्यापक नीतिगत ढाँचे का भी अभाव है । इस कारण उन्हें दिव्यांगता का लाभ प्राप्त करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है, जिसके वे हकदार हैं। लेखिका अपनी शोध-यात्रा में जब एक शहर से दूसरे शहर तक गईं और इन साहसी सैनिकों से मिली तो उन्हें अहसास हुआ कि हमारे बीच ऐसी कई अज्ञात और गुमनाम हस्तियाँ हैं, जिनकी कहानी अब तक किसी ने नहीं सुनी है। अपनी शारीरिक सीमाओं और जीवन भर के मानसिक सदमे के बावजूद प्रेरणा के प्रतीक के रूप में खड़े हैं। उनकी देशभक्ति अटल है और उनमें अद्भुत दृढ़ संकल्प दिखता है, जो अपने देश की सुरक्षा व सम्मान के लिए किसी भी सक्षम शरीर वाले से टकराने का दम रखते हैं। इस पुस्तक के माध्यम से लेखिका का इरादा इन सम्मानित लोगों के प्रति उदासीनता की ओर ध्यान खींचना और अधिकारियों से उनकी जरूरतों को पूरा करने का आग्रह करना है। दिव्यांगता बस मन में रहती है, इस मंत्र को उनमें से प्रत्येक ने दोहराया है। यह पुस्तक उन जीवट सैनिकों, भारतमाता के सच्चे सपूतों और राष्ट्र के प्रति उनकी उल्लेखनीय भक्ति को विनम्र श्रद्धांजलि है।

Language: Hindi

Page No: 216

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