HomeStore

Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Namdev - Madhav Hada (Edited By)

Product image 1
Product image 2

Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Namdev - Madhav Hada (Edited By)

Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Namdev - Madhav Hada (Edited by)

About The Product:

गागर में सागर की तरह इस पुस्तक में हिन्दी के कालजयी कवियों की विशाल काव्य-रचना में से श्रेष्ठतम और प्रतिनिधि काव्य का संकलन विस्तृत विवेचन के साथ प्रस्तुत है। नामदेव उत्तर भारतीय संत परंपरा के आदि संत हैं जिन्हें कबीर, गुरु नानक, दादू तुकाराम आदि अपने प्रेरक मानते थे। उनकी कई रचनाएँ ‘गुरु गंथ साहिब’ में सम्मिलित हैं। महाराष्ट्र में 1270 ई. में जन्मे नामदेव भी रचनाएँ गुजरात, राजस्थान, पंजाब और अन्य उत्तर भारतीय क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय हुईं। उनकी रचनाओं में सगुण-निर्गुण का कोई भेदबोध नहीं मिलता। नामदेव की वाणी सरल और सहज है जो भक्ति में डूबी होने के साथ कर्मफल और गुरु के महत्त्व पर उनके अटल विश्वास को दर्शाती है। यह विडंबना है कि आदि संत माने जाने के बावजूद हिन्दी में उनकी वाणी को यथोचित स्थान नहीं मिला है और उनकी गणना मराठी के संतों में ही होती आयी है। आशा है कि प्रस्तुत चयन नामदेव को हिन्दी में उनके सही महत्त्व देने में मददगार साबित होगा। इस पुस्तक का चयन व संपादन माधव हाड़ा ने किया है, जिनकी ख्याति भक्तिकाल के मर्मज्ञ के रूप में है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष माधव हाड़ा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में फै़लो रहे हैं। संप्रति वे साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली की साधारण सभा और हिन्दी परामर्श मंडल के सदस्य हैं।

Product Details:

  • Author: Madhav Hada (Edited by)
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 112
  • Publication Date: 2025

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

  • $12.12
    Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Namdev - Madhav Hada (Edited By)
    $12.12

    Product Information

    Shipping & Returns

    Description

    Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Namdev - Madhav Hada (Edited by)

    About The Product:

    गागर में सागर की तरह इस पुस्तक में हिन्दी के कालजयी कवियों की विशाल काव्य-रचना में से श्रेष्ठतम और प्रतिनिधि काव्य का संकलन विस्तृत विवेचन के साथ प्रस्तुत है। नामदेव उत्तर भारतीय संत परंपरा के आदि संत हैं जिन्हें कबीर, गुरु नानक, दादू तुकाराम आदि अपने प्रेरक मानते थे। उनकी कई रचनाएँ ‘गुरु गंथ साहिब’ में सम्मिलित हैं। महाराष्ट्र में 1270 ई. में जन्मे नामदेव भी रचनाएँ गुजरात, राजस्थान, पंजाब और अन्य उत्तर भारतीय क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय हुईं। उनकी रचनाओं में सगुण-निर्गुण का कोई भेदबोध नहीं मिलता। नामदेव की वाणी सरल और सहज है जो भक्ति में डूबी होने के साथ कर्मफल और गुरु के महत्त्व पर उनके अटल विश्वास को दर्शाती है। यह विडंबना है कि आदि संत माने जाने के बावजूद हिन्दी में उनकी वाणी को यथोचित स्थान नहीं मिला है और उनकी गणना मराठी के संतों में ही होती आयी है। आशा है कि प्रस्तुत चयन नामदेव को हिन्दी में उनके सही महत्त्व देने में मददगार साबित होगा। इस पुस्तक का चयन व संपादन माधव हाड़ा ने किया है, जिनकी ख्याति भक्तिकाल के मर्मज्ञ के रूप में है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष माधव हाड़ा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में फै़लो रहे हैं। संप्रति वे साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली की साधारण सभा और हिन्दी परामर्श मंडल के सदस्य हैं।

    Product Details:

  • Author: Madhav Hada (Edited by)
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 112
  • Publication Date: 2025

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

    Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Namdev - Madhav Hada (Edited By) | Dista