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Karbala - Premchand

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Karbala - Premchand

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About The Product:

680 ईसवीं में हुई कर्बला की लड़ाई इस्लाम के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी जिसमें पैगम्बर मोहम्मद के पोते और उनके 72 साथियों की शहादत हुई थी। इस लड़ाई को सिद्धांतों और अत्याचार के बीच का संघर्ष माना जाता है और शिया मुसलमान इस दिन को हर वर्ष मनाते हैं।
इसी ऐतिहासिक घटना पर आधारित 1924 में प्रेमचंद का नाटक 'कर्बला ' प्रकाशित हुआ था। आम बोलचाल की हिन्दी और उर्दू की मिश्रित भाषा में लिखा यह नाटक लोगों में आपसी सद्भाव बढ़ाने और वैमनस्य दूर करने की प्रेरणा देता है। चूँकि कर्बला की लड़ाई केवल शस्त्रों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि नैतिक मूल्यों की रक्षा का एक मानवीय संघर्ष था, इसलिए यह नाटक आज भी प्रासंगिक है।
प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के पास छोटे-से गाँव लमही में हुआ था। उनका पूरा नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। बचपन से ही उन्हें पुस्तकों से बहुत लगाव था। सबसे पहले उन्होंने ‘नवाबराय’ उपनाम से अपनी रचनाएँ लिखीं। बाद में उन्होंने ‘प्रेमचंद’ उपनाम अपनाया। उनका आरंभिक लेखन उर्दू में है लेकिन बाद में हिन्दी में लिखना शुरू किया। अपने 56 वर्ष के छोटे-से जीवन में उन्होंने अनेक उपन्यास, दो सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। कम लोग ही जानते हैं कि उन्होंने तीन नाटक भी लिखे हैं, जिसमें से 'कर्बला' सबसे चर्चित है। 8 अक्टूबर 1936 को ‘उपन्यास सम्राट’ प्रेमचंद का स्वर्गवास हो गया।

Product Details:

  • Author: Premchand
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 160
  • Publication Date: 2026

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

  • $4.52

    Original: $12.92

    -65%
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    680 ईसवीं में हुई कर्बला की लड़ाई इस्लाम के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी जिसमें पैगम्बर मोहम्मद के पोते और उनके 72 साथियों की शहादत हुई थी। इस लड़ाई को सिद्धांतों और अत्याचार के बीच का संघर्ष माना जाता है और शिया मुसलमान इस दिन को हर वर्ष मनाते हैं।
    इसी ऐतिहासिक घटना पर आधारित 1924 में प्रेमचंद का नाटक 'कर्बला ' प्रकाशित हुआ था। आम बोलचाल की हिन्दी और उर्दू की मिश्रित भाषा में लिखा यह नाटक लोगों में आपसी सद्भाव बढ़ाने और वैमनस्य दूर करने की प्रेरणा देता है। चूँकि कर्बला की लड़ाई केवल शस्त्रों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि नैतिक मूल्यों की रक्षा का एक मानवीय संघर्ष था, इसलिए यह नाटक आज भी प्रासंगिक है।
    प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के पास छोटे-से गाँव लमही में हुआ था। उनका पूरा नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। बचपन से ही उन्हें पुस्तकों से बहुत लगाव था। सबसे पहले उन्होंने ‘नवाबराय’ उपनाम से अपनी रचनाएँ लिखीं। बाद में उन्होंने ‘प्रेमचंद’ उपनाम अपनाया। उनका आरंभिक लेखन उर्दू में है लेकिन बाद में हिन्दी में लिखना शुरू किया। अपने 56 वर्ष के छोटे-से जीवन में उन्होंने अनेक उपन्यास, दो सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। कम लोग ही जानते हैं कि उन्होंने तीन नाटक भी लिखे हैं, जिसमें से 'कर्बला' सबसे चर्चित है। 8 अक्टूबर 1936 को ‘उपन्यास सम्राट’ प्रेमचंद का स्वर्गवास हो गया।

    Product Details:

  • Author: Premchand
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 160
  • Publication Date: 2026

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