HomeStore

Khidki To Main Ne Khol HI Li - Shariq kaifi

Product image 1

Khidki To Main Ne Khol HI Li - Shariq kaifi

Khidki To Main Ne Khol HI Li - Shariq kaifi

About The Product:

शारिक़ कैफ़ी (सय्यद शारिक़ हुसैन) बरेली (उत्तर प्रदेश) में पहली जून 1961 को पैदा हुए। वहीं बी.एस.सी. और एम.ए. (उर्दू) तक शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता कैफ़ी वजदानी (सय्यद रिफ़ाक़त हुसैन) मशहूर शाइ’र थे, इस तरह शाइ’री उन्हें विरासत में हासिल हुई। उनकी ग़ज़लों का पहला मज्मूआ’ ‘आ’म सा रद्द-ए-अ’मल’ 1989 में छपा। इस के बा’द, 2008 में दूसरा ग़ज़ल-संग्रह ‘यहाँ तक रौशनी आती कहाँ थी’ और 2010 में नज़्मों का मज्मूआ ‘अपने तमाशे का टिकट’ प्रकाशित हुआ। इन दिनों बरेली ही में रहते हैं।

Product Details:

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 165
  • Publication Date: 2017
  • Legal Disclaimer : Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

    $4.51

    Original: $12.89

    -65%
    Khidki To Main Ne Khol HI Li - Shariq kaifi

    $12.89

    $4.51

    Product Information

    Shipping & Returns

    Description

    Khidki To Main Ne Khol HI Li - Shariq kaifi

    About The Product:

    शारिक़ कैफ़ी (सय्यद शारिक़ हुसैन) बरेली (उत्तर प्रदेश) में पहली जून 1961 को पैदा हुए। वहीं बी.एस.सी. और एम.ए. (उर्दू) तक शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता कैफ़ी वजदानी (सय्यद रिफ़ाक़त हुसैन) मशहूर शाइ’र थे, इस तरह शाइ’री उन्हें विरासत में हासिल हुई। उनकी ग़ज़लों का पहला मज्मूआ’ ‘आ’म सा रद्द-ए-अ’मल’ 1989 में छपा। इस के बा’द, 2008 में दूसरा ग़ज़ल-संग्रह ‘यहाँ तक रौशनी आती कहाँ थी’ और 2010 में नज़्मों का मज्मूआ ‘अपने तमाशे का टिकट’ प्रकाशित हुआ। इन दिनों बरेली ही में रहते हैं।

    Product Details:

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 165
  • Publication Date: 2017
  • Legal Disclaimer : Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

    Khidki To Main Ne Khol HI Li - Shariq kaifi | Dista