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Madhukalash - Harivansh Rai 'Bachchan'

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Madhukalash - Harivansh Rai 'Bachchan'

Madhukalash - Harivansh Rai 'Bachchan'

About The Product:

मधुकलश की भूमिका में बच्चन जी ने लिखा है, "ये कविताएं सन् 1935-36 में लिखी गईं और सर्वप्रथम 1937 में प्रकाशित हुईं। इसके पहले मधुशाला 1935 में और मधुबाला 1936 में प्रकाशित हो चुकी थीं। मेरे जीवन का जो उत्साह, उल्लास और उन्माद-गो उनमें एक अभाव, एक असन्तोष, एक निराशा की व्यथा भी घुली-मिली थी-मधुशाला और मधुबाला में व्यक्त हुआ था, वह अब उतार पर था।“ आगे लिखते हैं, "ये कविताएं जीवन के रस से खाली नहीं हैं और जीवन का रस मधु ही मधु नहीं होता, कटु भी होता है... समर्थ के हाथों अमृत भी बनता है।"

Product Details:

  • Author: Harivansh Rai 'Bachchan'
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 112
  • Publication Date: 2023

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

  • $15.03
    Madhukalash - Harivansh Rai 'Bachchan'
    $15.03

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    Description

    Madhukalash - Harivansh Rai 'Bachchan'

    About The Product:

    मधुकलश की भूमिका में बच्चन जी ने लिखा है, "ये कविताएं सन् 1935-36 में लिखी गईं और सर्वप्रथम 1937 में प्रकाशित हुईं। इसके पहले मधुशाला 1935 में और मधुबाला 1936 में प्रकाशित हो चुकी थीं। मेरे जीवन का जो उत्साह, उल्लास और उन्माद-गो उनमें एक अभाव, एक असन्तोष, एक निराशा की व्यथा भी घुली-मिली थी-मधुशाला और मधुबाला में व्यक्त हुआ था, वह अब उतार पर था।“ आगे लिखते हैं, "ये कविताएं जीवन के रस से खाली नहीं हैं और जीवन का रस मधु ही मधु नहीं होता, कटु भी होता है... समर्थ के हाथों अमृत भी बनता है।"

    Product Details:

  • Author: Harivansh Rai 'Bachchan'
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 112
  • Publication Date: 2023

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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