
Mahakumbh : Narmada Se Triveni-Shipra Pathak
Mahakumbh : Narmada Se Triveni-Shipra Pathak
About the Products:
महाकुंभ का कल्पवास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और साधना का विराट् पर्व है। पवित्र संगम तट पर एक माह तक नियम, व्रत, स्नान और सेवा में जीवन को समर्पित करना ही कल्पवास का सार है। मान्यता है कि इस अवधि में किया गया जप, तप और दान मनुष्य को भीतर से रूपांतरित कर देता है। यही आध्यात्मिक ऊष्मा इस पुस्तक की आधारभूमि है। परंतु यह पुस्तक केवल घटनाओं का वर्णन नहीं करती; इसके पृष्ठों में कुछ अनकहे रहस्य भी छिपे हैं। क्या वास्तव में नागा बाबा के साथ डुबकी साधना ने कोई अदृश्य अनुभूति दी ? सिद्धि अखाड़ों के भ्रमण के दौरान कौन सी आध्यात्मिक ऊर्जा स्पंदित हुई ? प्रतिदिन हजार लोगों के भंडारे और थैला-थाली वितरण के पीछे सेवा का कौन सा मौन संकल्प था ? 13,000 किलोमीटर की पदयात्रा और 55 लाख पौधों का रोपण केवल आँकड़े नहीं, बल्कि प्रकृति और मानवता के प्रति समर्पण की कहानी है। जलवायु जागरण, हवन-यज्ञ, साधु-संत दर्शन इन सबके बीच कौन सा आंतरिक परिवर्तन जनमा ? यही जिज्ञासा इस कृति को पढ़ने के लिए पाठकों को आकर्षित करती है।
Language: Hindi
Page No: 160
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
Original: $15.85
-65%$15.85
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Mahakumbh : Narmada Se Triveni-Shipra Pathak
About the Products:
महाकुंभ का कल्पवास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और साधना का विराट् पर्व है। पवित्र संगम तट पर एक माह तक नियम, व्रत, स्नान और सेवा में जीवन को समर्पित करना ही कल्पवास का सार है। मान्यता है कि इस अवधि में किया गया जप, तप और दान मनुष्य को भीतर से रूपांतरित कर देता है। यही आध्यात्मिक ऊष्मा इस पुस्तक की आधारभूमि है। परंतु यह पुस्तक केवल घटनाओं का वर्णन नहीं करती; इसके पृष्ठों में कुछ अनकहे रहस्य भी छिपे हैं। क्या वास्तव में नागा बाबा के साथ डुबकी साधना ने कोई अदृश्य अनुभूति दी ? सिद्धि अखाड़ों के भ्रमण के दौरान कौन सी आध्यात्मिक ऊर्जा स्पंदित हुई ? प्रतिदिन हजार लोगों के भंडारे और थैला-थाली वितरण के पीछे सेवा का कौन सा मौन संकल्प था ? 13,000 किलोमीटर की पदयात्रा और 55 लाख पौधों का रोपण केवल आँकड़े नहीं, बल्कि प्रकृति और मानवता के प्रति समर्पण की कहानी है। जलवायु जागरण, हवन-यज्ञ, साधु-संत दर्शन इन सबके बीच कौन सा आंतरिक परिवर्तन जनमा ? यही जिज्ञासा इस कृति को पढ़ने के लिए पाठकों को आकर्षित करती है।
Language: Hindi
Page No: 160
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