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Mann Ke Manjeere_Rachna Bhola 'Yamini'_Paperback - Bhola 'Yamini', Rachna

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Mann Ke Manjeere_Rachna Bhola 'Yamini'_Paperback - Bhola 'Yamini', Rachna

Mann Ke Manjeere_Rachna Bhola 'Yamini'_Paperback - Bhola 'Yamini', Rachna

About The Product:

‘‘ठिठुरते जाड़े में, तेरे प्रेम की गरमाहट से, सूफ़ी क़लंदर के तन पर लिपटी, मोटी सूती चादर से, हमारी फ़क़ीरी के आलम में, इश्क़ की नवाबी शान से, संजीदा उमरों के बीच, दिल की शोख़ नादानियों से तेरे कांधे पर रखे सर से, मिलने वाली राहत से, तेरे हौसले, भरोसे और अपनेपन के आफ़ताब से लिखे हैं लव नोट्स! जो तुमसे कभी कहे तो नहीं गए, पर यकीं है कि तुमने सुन ही लिए होंगे। ये सतरें... मेरा इश्क़, मेरी इबादत, मेरी आश्ना, मेरा जुनूँ, मेरी कलम, मेरा कलमा ये हैं मन के मंजीरे!’’ इश्क़ की हर बात कह देने के बाद भी बात अधूरी जान पड़ती है और लगता है कि बस वही तो कहना था, जो अब भी कहना बाक़ी है। कह देने और न कह पाने की इसी जद्दोजहद का नतीजा हैं, ये मन के मंजीरे... रचना भोला ‘यामिनी’ ने पिछले दो दशकों में अनगिनत पुस्तकों के अनुवाद किये हैं। मौलिक लेखन में उनकी कृतियाँ, याज्ञसेनी और प्रयास उल्लेखनीय हैं। मन के मंजीरे में रचना भोला ‘यामिनी’ ने आत्मिक प्रेम की अनुभूतियों को बड़ी सहजता और बेहद खूबसूरती से कागज़ पर उतारा है।

Product Details:

  • Author: Bhola 'Yamini', Rachna
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 144
  • Publication Date: 2018

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

  • $4.50

    Original: $12.85

    -65%
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    Product Information

    Shipping & Returns

    Description

    Mann Ke Manjeere_Rachna Bhola 'Yamini'_Paperback - Bhola 'Yamini', Rachna

    About The Product:

    ‘‘ठिठुरते जाड़े में, तेरे प्रेम की गरमाहट से, सूफ़ी क़लंदर के तन पर लिपटी, मोटी सूती चादर से, हमारी फ़क़ीरी के आलम में, इश्क़ की नवाबी शान से, संजीदा उमरों के बीच, दिल की शोख़ नादानियों से तेरे कांधे पर रखे सर से, मिलने वाली राहत से, तेरे हौसले, भरोसे और अपनेपन के आफ़ताब से लिखे हैं लव नोट्स! जो तुमसे कभी कहे तो नहीं गए, पर यकीं है कि तुमने सुन ही लिए होंगे। ये सतरें... मेरा इश्क़, मेरी इबादत, मेरी आश्ना, मेरा जुनूँ, मेरी कलम, मेरा कलमा ये हैं मन के मंजीरे!’’ इश्क़ की हर बात कह देने के बाद भी बात अधूरी जान पड़ती है और लगता है कि बस वही तो कहना था, जो अब भी कहना बाक़ी है। कह देने और न कह पाने की इसी जद्दोजहद का नतीजा हैं, ये मन के मंजीरे... रचना भोला ‘यामिनी’ ने पिछले दो दशकों में अनगिनत पुस्तकों के अनुवाद किये हैं। मौलिक लेखन में उनकी कृतियाँ, याज्ञसेनी और प्रयास उल्लेखनीय हैं। मन के मंजीरे में रचना भोला ‘यामिनी’ ने आत्मिक प्रेम की अनुभूतियों को बड़ी सहजता और बेहद खूबसूरती से कागज़ पर उतारा है।

    Product Details:

  • Author: Bhola 'Yamini', Rachna
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 144
  • Publication Date: 2018

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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