
Mata Bhoomi-Dr. Vasudeva Sharan Agrawala
Mata Bhoomi-Dr. Vasudeva Sharan Agrawala
About the Products:
‘माता भूमि’ राष्ट्रीय स्वतंत्रता के संक्रमण काल में लिखे हुए आचार्य वासुदेवशरण अग्रवाल के कुछ लेखों का संग्रह है। इनमें राष्ट्र के उभरते हुए नए स्वरूप के प्रति तथ्यात्मक भावनाएँ हैं एवं उसके जीवन के जो बहुविध पहलू हैं, उनके प्रति ध्यान दिलाया गया है। भूमि, जन और संस्कृति—इन तीनों के मेल तथा विकास से राष्ट्र का स्वरूप बनता है। इन तीनों क्षेत्रों में भूतकाल का लंबा इतिहास भारत राष्ट्र के पीछे है। वह सब हमारे वर्तमान जीवन की रसायन-खाद बनकर उसे रस से सींच रहा है और भावी विकास के लिए पल्लवित कर रहा है। मानवीय विकास की यही सत्य विधि है। अतएव इन लेखों में बारंबार जीवन के प्राचीन सूत्रों की ओर ध्यान दिलाते हुए यह समझाने का प्रयत्न किया गया है कि उनसे हमारा राष्ट्र और जीवन किस प्रकार अधिक तेजस्वी, स्वावलंबी और अपने क्षेत्र में एवं विश्व के साथ समवाय तथा संप्रीति-संपन्न बन सकता है। राष्ट्रभाव जाग्रत् करने वाले भावपूर्ण लेखों का पठनीय और संग्रहणीय संकलन।
Language: Hindi
Page No: 232
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
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Description
Mata Bhoomi-Dr. Vasudeva Sharan Agrawala
About the Products:
‘माता भूमि’ राष्ट्रीय स्वतंत्रता के संक्रमण काल में लिखे हुए आचार्य वासुदेवशरण अग्रवाल के कुछ लेखों का संग्रह है। इनमें राष्ट्र के उभरते हुए नए स्वरूप के प्रति तथ्यात्मक भावनाएँ हैं एवं उसके जीवन के जो बहुविध पहलू हैं, उनके प्रति ध्यान दिलाया गया है। भूमि, जन और संस्कृति—इन तीनों के मेल तथा विकास से राष्ट्र का स्वरूप बनता है। इन तीनों क्षेत्रों में भूतकाल का लंबा इतिहास भारत राष्ट्र के पीछे है। वह सब हमारे वर्तमान जीवन की रसायन-खाद बनकर उसे रस से सींच रहा है और भावी विकास के लिए पल्लवित कर रहा है। मानवीय विकास की यही सत्य विधि है। अतएव इन लेखों में बारंबार जीवन के प्राचीन सूत्रों की ओर ध्यान दिलाते हुए यह समझाने का प्रयत्न किया गया है कि उनसे हमारा राष्ट्र और जीवन किस प्रकार अधिक तेजस्वी, स्वावलंबी और अपने क्षेत्र में एवं विश्व के साथ समवाय तथा संप्रीति-संपन्न बन सकता है। राष्ट्रभाव जाग्रत् करने वाले भावपूर्ण लेखों का पठनीय और संग्रहणीय संकलन।
Language: Hindi
Page No: 232
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