
Meri Nazar Se Duniya Ki Sair मेरी नजर से दुनिया की सैर | Travelogue Book In Hindi-Himanshu Joshi
Meri Nazar Se Duniya Ki Sair मेरी नजर से दुनिया की सैर | Travelogue Book In Hindi-Himanshu Joshi
About the Products:
हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हिमांशु जोशी ने अपनी दीर्घ साहित्यिक यात्रा के दौरान देश-विदेश में अनेक यात्राएँ कीं। इन यात्राओं में अरुणाचल, नगालैंड के दुर्गम सीमा क्षेत्र शामिल हैं तो सुदूर में ‘यातना शिविर’ अंडमान भी। नॉर्वे की अनोखी धरती में जहाँ नोबेल पुरस्कार विजेता ब्यौंसन का घर है, वहीं बर्गन की स्मृतियों के साथ-साथ सागर तट की वह मशाल भी है, जो भारतीय संत की याद में आज भी जलती रहती है। इन यात्राओं के दौरान थाईलैंड में भारतीय संस्कृति की छाप हर जगह देखने को मिलती है। वहाँ ‘अयुध्या’, ‘रामकियन’ और ‘राम उद्यान’ भी दिखलाई देंगे। कुमाऊँ के घने जंगलों में उत्तर-पथ के रास्ते अंतिम पड़ाव में नैनीताल का सौंदर्य भी दिखता है। साथ ही अमरीका में आँखों देखा भारत महोत्सव का चमत्कार तथा और भी बहुत कुछ। ये यात्रा-विवरण मात्र यात्रा के विवरण ही नहीं हैं वरन् इनमें कहीं इतिहास है, भूगोल के साथ-साथ साहित्य भी, कला एवं संस्कृति की मार्मिक छुअन भी। इसलिए ये वृत्तांत कहीं दस्तावेज भी बन गए हैं—जीए हुए अतीत के। पाठकों को इनसे एक संपूर्ण जीवन का अहसास होने लगता है। एक साथ वह बहुत कुछ ग्रहण करने में सफल होता है—शायद यह भी इन वृत्तांतों की एक सबसे बड़ी सफलता है।
Language: Hindi
Page No: 168
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
Original: $16.77
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Meri Nazar Se Duniya Ki Sair मेरी नजर से दुनिया की सैर | Travelogue Book In Hindi-Himanshu Joshi
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हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हिमांशु जोशी ने अपनी दीर्घ साहित्यिक यात्रा के दौरान देश-विदेश में अनेक यात्राएँ कीं। इन यात्राओं में अरुणाचल, नगालैंड के दुर्गम सीमा क्षेत्र शामिल हैं तो सुदूर में ‘यातना शिविर’ अंडमान भी। नॉर्वे की अनोखी धरती में जहाँ नोबेल पुरस्कार विजेता ब्यौंसन का घर है, वहीं बर्गन की स्मृतियों के साथ-साथ सागर तट की वह मशाल भी है, जो भारतीय संत की याद में आज भी जलती रहती है। इन यात्राओं के दौरान थाईलैंड में भारतीय संस्कृति की छाप हर जगह देखने को मिलती है। वहाँ ‘अयुध्या’, ‘रामकियन’ और ‘राम उद्यान’ भी दिखलाई देंगे। कुमाऊँ के घने जंगलों में उत्तर-पथ के रास्ते अंतिम पड़ाव में नैनीताल का सौंदर्य भी दिखता है। साथ ही अमरीका में आँखों देखा भारत महोत्सव का चमत्कार तथा और भी बहुत कुछ। ये यात्रा-विवरण मात्र यात्रा के विवरण ही नहीं हैं वरन् इनमें कहीं इतिहास है, भूगोल के साथ-साथ साहित्य भी, कला एवं संस्कृति की मार्मिक छुअन भी। इसलिए ये वृत्तांत कहीं दस्तावेज भी बन गए हैं—जीए हुए अतीत के। पाठकों को इनसे एक संपूर्ण जीवन का अहसास होने लगता है। एक साथ वह बहुत कुछ ग्रहण करने में सफल होता है—शायद यह भी इन वृत्तांतों की एक सबसे बड़ी सफलता है।
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