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Pesa : Adivasiyat Ki Gram Sansad-Sudhir Pal

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Pesa : Adivasiyat Ki Gram Sansad-Sudhir Pal

Pesa : Adivasiyat Ki Gram Sansad-Sudhir Pal

About the Products:

देश के पाँचवीं अनुसूचित क्षेत्र की जादुई जमीन पर 'पेसा' एक नए लोकतंत्र की दस्तक है। यह खुली हवा में साँस लेने जैसा है, पेड़ों की छाँव में बैठने जैसा है, नदी के किनारे गाँव की बैठक जैसा है; जहाँ हर आवाज सुनी जाती है, हर हाथ गिना जाता है और हर जीवन की अहमियत होती है। यह पुस्तक इसी दस्तक की गूंज है। जब पहाड़ों के बीच साल और सखुआ के जंगलों में किसी माँझी, किसी मुंडा, किसी मानकी ने पहली बार कहा, "हम इस देश के पहले नागरिक हैं। यहाँ के संसाधनों पर पहला हक हमारा है" तो वह सिर्फ एक आवाज नहीं थी, बल्कि सदियों की चुप्पी को तोड़ता हुआ पाँचवीं अनुसूची का सबसे बढ़िया विस्तार था-पेसा। 'पेसा', यानी 'पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र में विस्तार) अधिनियम, 1996'। यह कानून मात्र धाराओं की एक श्रृंखला नहीं बल्कि उन आदिवासी समुदायों का सम्मान है, जिन्होंने हजारों वर्षों से बिना लिखे संविधान के लोकतंत्र को जीवित रखा है-बिना तख्त के, बिना ताज के, बिना सत्ता के। यह पुस्तक उन आवाजों की, उन सपनों की और उन यात्राओं की साझेदारी है, जो 'पेसा' को केवल एक अधिनियम नहीं बल्कि आदिवासियत की संस्कृति को बचाने और उसे संवर्धित करने के लिए जरूरी समझते हैं।

Language: Hindi

Page No: 216

Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.

$19.86
Pesa : Adivasiyat Ki Gram Sansad-Sudhir Pal
$19.86

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Pesa : Adivasiyat Ki Gram Sansad-Sudhir Pal

About the Products:

देश के पाँचवीं अनुसूचित क्षेत्र की जादुई जमीन पर 'पेसा' एक नए लोकतंत्र की दस्तक है। यह खुली हवा में साँस लेने जैसा है, पेड़ों की छाँव में बैठने जैसा है, नदी के किनारे गाँव की बैठक जैसा है; जहाँ हर आवाज सुनी जाती है, हर हाथ गिना जाता है और हर जीवन की अहमियत होती है। यह पुस्तक इसी दस्तक की गूंज है। जब पहाड़ों के बीच साल और सखुआ के जंगलों में किसी माँझी, किसी मुंडा, किसी मानकी ने पहली बार कहा, "हम इस देश के पहले नागरिक हैं। यहाँ के संसाधनों पर पहला हक हमारा है" तो वह सिर्फ एक आवाज नहीं थी, बल्कि सदियों की चुप्पी को तोड़ता हुआ पाँचवीं अनुसूची का सबसे बढ़िया विस्तार था-पेसा। 'पेसा', यानी 'पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र में विस्तार) अधिनियम, 1996'। यह कानून मात्र धाराओं की एक श्रृंखला नहीं बल्कि उन आदिवासी समुदायों का सम्मान है, जिन्होंने हजारों वर्षों से बिना लिखे संविधान के लोकतंत्र को जीवित रखा है-बिना तख्त के, बिना ताज के, बिना सत्ता के। यह पुस्तक उन आवाजों की, उन सपनों की और उन यात्राओं की साझेदारी है, जो 'पेसा' को केवल एक अधिनियम नहीं बल्कि आदिवासियत की संस्कृति को बचाने और उसे संवर्धित करने के लिए जरूरी समझते हैं।

Language: Hindi

Page No: 216

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