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Prachin Bhartiye Paramparao me Naitikta - Dr. Deepak Kumar

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Prachin Bhartiye Paramparao me Naitikta - Dr. Deepak Kumar

Prachin Bhartiye Paramparao me Naitikta - Dr. Deepak Kumar

About The Product:

यह पुस्तक प्राचीन भारत के उन शाश्वत जीवन मूल्यों की गहराई से पड़ताल करती है, जिन्होंने सदियों से भारतीय सभ्यता का मागर्दशर्न किया है। इसमें वेदों, उपनिषदों, धर्मशास्रों, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण, महाभारत, तथा जैन और बौद्ध दशर्न में निहित नैतिक शिक्षाओं का विश्लेषण किया गया है। नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, यह पुस्तक दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित VAC पाठ्यक्रम के सभी इकाइयों को समग्रता से समाहित करती है। पुस्तक में जटिल दार्शनिक अवधारणाओं को भी छात्रों और आम पाठकों के लिए अत्यंत सरल, सहज और रोचक भाषा-शैली में प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक न केवल अकादिमक आवश्यकताओं की पूर्ति करेगी, बल्कि भारतीय मूल्यों को गहराई से समझने के इच्छुक विद्यार्थियों सहित प्रत्येक पाठक की अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और एक अधिक सार्थक एवं नैतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगी।Dr. Deepak Kumar

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 457
  • Publisher: Motilal Banarsidass
  • Category: Philosophy
  • Publication Date: (1/1/2026)
  • Legal Disclaimer : Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

    $12.36

    Original: $35.32

    -65%
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    Description

    Prachin Bhartiye Paramparao me Naitikta - Dr. Deepak Kumar

    About The Product:

    यह पुस्तक प्राचीन भारत के उन शाश्वत जीवन मूल्यों की गहराई से पड़ताल करती है, जिन्होंने सदियों से भारतीय सभ्यता का मागर्दशर्न किया है। इसमें वेदों, उपनिषदों, धर्मशास्रों, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण, महाभारत, तथा जैन और बौद्ध दशर्न में निहित नैतिक शिक्षाओं का विश्लेषण किया गया है। नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, यह पुस्तक दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित VAC पाठ्यक्रम के सभी इकाइयों को समग्रता से समाहित करती है। पुस्तक में जटिल दार्शनिक अवधारणाओं को भी छात्रों और आम पाठकों के लिए अत्यंत सरल, सहज और रोचक भाषा-शैली में प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक न केवल अकादिमक आवश्यकताओं की पूर्ति करेगी, बल्कि भारतीय मूल्यों को गहराई से समझने के इच्छुक विद्यार्थियों सहित प्रत्येक पाठक की अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और एक अधिक सार्थक एवं नैतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगी।Dr. Deepak Kumar

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 457
  • Publisher: Motilal Banarsidass
  • Category: Philosophy
  • Publication Date: (1/1/2026)
  • Legal Disclaimer : Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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