
Pranayveena-Mohan Lal Upadhyaya
Pranayveena-Mohan Lal Upadhyaya
About the Products:
प्रणयवीणा' उपन्यास की भावात्मक अनुगूँज इसके समग्र कथ्य में अनुभव होती है। प्रस्तुति की रोचकता, मोहक दृश्यविधान, घटनाक्रम व ऐतिहासिक सूक्ष्मता के कारण उपन्यास पूर्णतः पठनीयसंग्रहणीय है। प्रेम तथा करुणा के मर्मस्पर्शी प्रसंग इतने स्नेहस्निग्ध और भावार्द्र हैं कि अंतःकरण में उतरकर उनकी तरल विरलता अविरल रहती है। उपन्यास में काल्पनिकता व मौलिकता के परस्पर बंध कहीं ढीले नहीं पड़े, सत्य और तथ्य के जोड़ रचना में झलकते तो हैं किंतु कहीं वे खुले नहीं हैं। उपन्यास का शैलीसौष्ठव उल्लेख्य है। चरितनायक उदयन की 'प्रणयवीणा' लेखक का प्रथित साहित्यिक योगदान है। ललित कला के उत्कृष्ट लालित्य तथा उसके अलौकिक स्वर्गारोह की धूपछाँही बुनावट जितनी सूक्ष्मविलक्षण है, उतनी ही वह भव्य भास्वर है।
Language: Hindi
Page No: 240
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
Product Information
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Shipping & Returns
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Pranayveena-Mohan Lal Upadhyaya
About the Products:
प्रणयवीणा' उपन्यास की भावात्मक अनुगूँज इसके समग्र कथ्य में अनुभव होती है। प्रस्तुति की रोचकता, मोहक दृश्यविधान, घटनाक्रम व ऐतिहासिक सूक्ष्मता के कारण उपन्यास पूर्णतः पठनीयसंग्रहणीय है। प्रेम तथा करुणा के मर्मस्पर्शी प्रसंग इतने स्नेहस्निग्ध और भावार्द्र हैं कि अंतःकरण में उतरकर उनकी तरल विरलता अविरल रहती है। उपन्यास में काल्पनिकता व मौलिकता के परस्पर बंध कहीं ढीले नहीं पड़े, सत्य और तथ्य के जोड़ रचना में झलकते तो हैं किंतु कहीं वे खुले नहीं हैं। उपन्यास का शैलीसौष्ठव उल्लेख्य है। चरितनायक उदयन की 'प्रणयवीणा' लेखक का प्रथित साहित्यिक योगदान है। ललित कला के उत्कृष्ट लालित्य तथा उसके अलौकिक स्वर्गारोह की धूपछाँही बुनावट जितनी सूक्ष्मविलक्षण है, उतनी ही वह भव्य भास्वर है।
Language: Hindi
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