

Purushottam - Bhagwati Sharan Mishra
Purushottam - Bhagwati Sharan Mishra
About The Product:
ऐतिहासिक एवं पौराणिक गाथाओं को आधुनिक संदर्भ प्रदान करने में सिद्धहस्त, बहुचर्चित लेखक की औपन्यासिक कृति अपनी भाषा के माधुर्य एवं शिल्पगत सौष्ठव द्वारा पाठक को मुग्ध किए बिना नहीं रहेगी। 'पीताम्बर' एवं 'पवनपुत्र' जैसी बहुचर्चित कृतियों के पश्चात श्रीकृष्ण-जीवन के उत्तरार्द्ध पर आधारित यह बृहत उपन्यास डॉ. भगवतीशरण मिश्र की लेखकीय यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जो केवल अपनी आधुनिक दृष्टि ही नहीं अपितु विचारों की नवोन्मेषता और मौलिकता के कारण भी विशिष्ट है। डॉ. मिश्र शिल्पकार पहले हैं और उपन्यासकार बाद में, यही कारण है कि पुस्तक अथ से इति तक पाठक के मन को बांधने मैं सक्षम है और श्रीकृष्ण के बहुआयामी व्यक्तित्व के जटिलतम प्रसंग भी बोधगम्य एवं सहज, सरल बन आए हैं। श्री कृष्ण को लेखक ने पुरुषोत्तम के रूप में ही देखा है और उसकी यह दृष्टि इस कृति को प्रासंगिक के साथ-साथ उपयोगी भी बना जाती है। विघटनशील मानवीय मूल्यों के इस काल में आदर्शों एवं मूल्यों की पुनर्स्थापना के सफल प्रयास का ही नाम है 'पुरुषोत्तम'।
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Purushottam - Bhagwati Sharan Mishra
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ऐतिहासिक एवं पौराणिक गाथाओं को आधुनिक संदर्भ प्रदान करने में सिद्धहस्त, बहुचर्चित लेखक की औपन्यासिक कृति अपनी भाषा के माधुर्य एवं शिल्पगत सौष्ठव द्वारा पाठक को मुग्ध किए बिना नहीं रहेगी। 'पीताम्बर' एवं 'पवनपुत्र' जैसी बहुचर्चित कृतियों के पश्चात श्रीकृष्ण-जीवन के उत्तरार्द्ध पर आधारित यह बृहत उपन्यास डॉ. भगवतीशरण मिश्र की लेखकीय यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जो केवल अपनी आधुनिक दृष्टि ही नहीं अपितु विचारों की नवोन्मेषता और मौलिकता के कारण भी विशिष्ट है। डॉ. मिश्र शिल्पकार पहले हैं और उपन्यासकार बाद में, यही कारण है कि पुस्तक अथ से इति तक पाठक के मन को बांधने मैं सक्षम है और श्रीकृष्ण के बहुआयामी व्यक्तित्व के जटिलतम प्रसंग भी बोधगम्य एवं सहज, सरल बन आए हैं। श्री कृष्ण को लेखक ने पुरुषोत्तम के रूप में ही देखा है और उसकी यह दृष्टि इस कृति को प्रासंगिक के साथ-साथ उपयोगी भी बना जाती है। विघटनशील मानवीय मूल्यों के इस काल में आदर्शों एवं मूल्यों की पुनर्स्थापना के सफल प्रयास का ही नाम है 'पुरुषोत्तम'।
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