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Reteela - Harshul, Anand

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Reteela - Harshul, Anand

Reteela - Harshul, Anand

About The Product:

‘‘हम भारतीय जो खुद को प्रकृति की निरन्तरता में देखने का दावा करते नहीं थकते, किस निम्न स्तर पर जाकर, प्रकृति को विनष्ट करने में पूरे मनोयोग से जुट सकते हैं - रेतीला इसकी मार्मिक कथा कहता है। इसे पढ़ते हुए कभी लगता ही नहीं है कि पेड़-पौधे, नदी-पहाड़, पशु-पक्षी किसी भी तरह से निर्जीव हों, उन्हें आनंद हर्षुल ने उनकी धड़कनों, स्पंदनों के साथ वर्णित किया है लेकिन इसके साथ ही भोले आदिवासियों को हर स्तर पर ठगने के प्रयास में उद्घाटित होती मानवीय लिप्सा भी अपने लिजलिजे खून और माँस में लिथड़ी प्रकट होती चलती है। आनंद रेतीला में नयी टैकनोलॉजी के उस अमानवीय हत्यारे पक्ष को भी रोशनी में ले आते हैं जो हमारे तथाकथित विकास के विमर्श से हमेशा बाहर छूट जाता है।’’ - उदयन वाजपेयी आनंद हर्षुल ऐसे कथाकार हैं जिनके यहाँ, अत्यंत संवेदनशील तथा कल्पनाप्रवण गद्य के रूप में, एक विरल किस्म की सर्जनात्मक चेष्टा दिखाई देती है। ’उनके यहाँ भाषा उड़ान लेती है और यथार्थ को विलक्षण ढंग से मुक्त करती है।’ उनके चार कहानी-संग्रह एवं एक उपन्यास अब तक प्रकाशित हैं। वे ‘सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार’ (1997) ‘विजय वर्मा अखिल भारतीय कथा सम्मान‘ (2003) ‘वनमाली कथा सम्मान (2014) तथा ‘संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की सीनियर फलोशिप’ (2020-21) से सम्मानित हैं।

Product Details:

  • Author: Harshul, Anand
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 128
  • Publication Date: 2025

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

  • $12.49
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    $12.49

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    Reteela - Harshul, Anand

    About The Product:

    ‘‘हम भारतीय जो खुद को प्रकृति की निरन्तरता में देखने का दावा करते नहीं थकते, किस निम्न स्तर पर जाकर, प्रकृति को विनष्ट करने में पूरे मनोयोग से जुट सकते हैं - रेतीला इसकी मार्मिक कथा कहता है। इसे पढ़ते हुए कभी लगता ही नहीं है कि पेड़-पौधे, नदी-पहाड़, पशु-पक्षी किसी भी तरह से निर्जीव हों, उन्हें आनंद हर्षुल ने उनकी धड़कनों, स्पंदनों के साथ वर्णित किया है लेकिन इसके साथ ही भोले आदिवासियों को हर स्तर पर ठगने के प्रयास में उद्घाटित होती मानवीय लिप्सा भी अपने लिजलिजे खून और माँस में लिथड़ी प्रकट होती चलती है। आनंद रेतीला में नयी टैकनोलॉजी के उस अमानवीय हत्यारे पक्ष को भी रोशनी में ले आते हैं जो हमारे तथाकथित विकास के विमर्श से हमेशा बाहर छूट जाता है।’’ - उदयन वाजपेयी आनंद हर्षुल ऐसे कथाकार हैं जिनके यहाँ, अत्यंत संवेदनशील तथा कल्पनाप्रवण गद्य के रूप में, एक विरल किस्म की सर्जनात्मक चेष्टा दिखाई देती है। ’उनके यहाँ भाषा उड़ान लेती है और यथार्थ को विलक्षण ढंग से मुक्त करती है।’ उनके चार कहानी-संग्रह एवं एक उपन्यास अब तक प्रकाशित हैं। वे ‘सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार’ (1997) ‘विजय वर्मा अखिल भारतीय कथा सम्मान‘ (2003) ‘वनमाली कथा सम्मान (2014) तथा ‘संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की सीनियर फलोशिप’ (2020-21) से सम्मानित हैं।

    Product Details:

  • Author: Harshul, Anand
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 128
  • Publication Date: 2025

    Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.

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