
Shatvarsheeya Sangh-Varun Soni
Shatvarsheeya Sangh-Varun Soni
About the Products:
शतवर्षीय संघ भारत के नवोत्थान की संकल्पयात्रा' पुस्तक संघ के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर प्रस्तुत केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि एक विचार-यात्रा का जीवंत प्रमाण है। वर्षों के निरंतर, मनोयोगपूर्वक किए गए श्रम और अनुसंधान का साकार रूप यह पुस्तक पाठक को संघ के दर्शन, उसके संगठन-तत्त्व, कार्यपद्धति और शताब्दियों की सांस्कृतिक चेतना से जुड़े मूल विचारों तक सरल, आधुनिक और सहज भाषा में पहुँचाती है। इस पुस्तक की विशिष्टता यह है कि इसे आज के युवा, प्रोफेशनल और बौद्धिक पाठक वर्ग की मानसिक संरचना को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। वे पाठक जो कॉर्पोरेट जगत्, प्रशासनिक सेवाओं, टेक्नोलॉजी, चिकित्सा, वाणिज्य और IIT-IIM-AIIMS जैसे संस्थानों से जुड़े हैं। ऐसे लोग जो संघ के बारे में जानना चाहते हैं, परंतु उसकी व्यापकता, कार्यप्रणाली और समाज पर सूक्ष्म प्रभावों को समझने के लिए एक समकालीन शैली में लिखित विश्वसनीय संदर्भ की तलाश में रहते हैं। यह पुस्तक संघनिष्ठ स्वयंसेवकों के साथ-साथ संघ के बाहर के उन जिज्ञासु पाठकों के लिए है, जो संघ को उसी की भाषा में, बिना पूर्वग्रह और बिना तकनीकी जटिलताओं के समझना चाहते हैं। पूरी रचना को छोटे-छोटे गद्य खंडों, स्पष्ट शीर्ष-उपशीर्षकों, उदाहरणों और तथ्यों से सजाकर इस प्रकार संरचित किया गया है कि तीव्र गति से पढ़नेवाले आधुनिक पाठक भी सहजता से जुड़ सकें।
Language: Hindi
Page No: 256
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
Original: $21.67
-65%$21.67
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Description
Shatvarsheeya Sangh-Varun Soni
About the Products:
शतवर्षीय संघ भारत के नवोत्थान की संकल्पयात्रा' पुस्तक संघ के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर प्रस्तुत केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि एक विचार-यात्रा का जीवंत प्रमाण है। वर्षों के निरंतर, मनोयोगपूर्वक किए गए श्रम और अनुसंधान का साकार रूप यह पुस्तक पाठक को संघ के दर्शन, उसके संगठन-तत्त्व, कार्यपद्धति और शताब्दियों की सांस्कृतिक चेतना से जुड़े मूल विचारों तक सरल, आधुनिक और सहज भाषा में पहुँचाती है। इस पुस्तक की विशिष्टता यह है कि इसे आज के युवा, प्रोफेशनल और बौद्धिक पाठक वर्ग की मानसिक संरचना को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। वे पाठक जो कॉर्पोरेट जगत्, प्रशासनिक सेवाओं, टेक्नोलॉजी, चिकित्सा, वाणिज्य और IIT-IIM-AIIMS जैसे संस्थानों से जुड़े हैं। ऐसे लोग जो संघ के बारे में जानना चाहते हैं, परंतु उसकी व्यापकता, कार्यप्रणाली और समाज पर सूक्ष्म प्रभावों को समझने के लिए एक समकालीन शैली में लिखित विश्वसनीय संदर्भ की तलाश में रहते हैं। यह पुस्तक संघनिष्ठ स्वयंसेवकों के साथ-साथ संघ के बाहर के उन जिज्ञासु पाठकों के लिए है, जो संघ को उसी की भाषा में, बिना पूर्वग्रह और बिना तकनीकी जटिलताओं के समझना चाहते हैं। पूरी रचना को छोटे-छोटे गद्य खंडों, स्पष्ट शीर्ष-उपशीर्षकों, उदाहरणों और तथ्यों से सजाकर इस प्रकार संरचित किया गया है कि तीव्र गति से पढ़नेवाले आधुनिक पाठक भी सहजता से जुड़ सकें।
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