
That Night: Four Friends, Twenty Years: (Hindi Translation) चार सहेलियाँ, बीस साल | A Horror Mystery | A Gripping Thriller Novel With Friendship Betrayal And Redemption-Nidhi Upadhyay
That Night: Four Friends, Twenty Years: (Hindi Translation) चार सहेलियाँ, बीस साल | A Horror Mystery | A Gripping Thriller Novel With Friendship Betrayal And Redemption-Nidhi Upadhyay
About the Products:
कोहरा इतना गहरा था, जैसे बादलों की टोली धरती पर उतर आई हो । ऐसा लग रहा था कि इस डरावनी अँधेरी रात में कम-से-कम मौसम मेरा साथ दे रहा था । सर्दियों की घनी धुंध ने जादूगर बन सबकुछ अपने अचल में समेट लिया था। मुझे भी । मैं दबे पाँव हॉस्टल के गेट से बाहर निकल आई। हवा का कण-कण ठंड से भरा हुआ था। पेड़ भी कुछ इस तरह से बर्फीली ओस से लदे थे कि उनके स्पर्श मात्र से कंपकैपी छूट जाए। मैं घुटनों के बल बैठकर गड्ढा खोदने लगी। इससे पहले कि घास में छिपी खून जमा देनेवाली ठंडक मेरी हड्डियों में जम जाती, मैं घुटनों के बल बैठकर तेजी से गड्ढे को और गहरा खोदने लगी। मेरी सुन्न पड़ती उँगलियों ने सिक्के और ओइजा शीट को मिट्टी में गाड़कर ही राहत की साँस ली। मैंने राक्षसों को दफन कर दिया ।
Language: Hindi
Page No: 288
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
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Description
That Night: Four Friends, Twenty Years: (Hindi Translation) चार सहेलियाँ, बीस साल | A Horror Mystery | A Gripping Thriller Novel With Friendship Betrayal And Redemption-Nidhi Upadhyay
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कोहरा इतना गहरा था, जैसे बादलों की टोली धरती पर उतर आई हो । ऐसा लग रहा था कि इस डरावनी अँधेरी रात में कम-से-कम मौसम मेरा साथ दे रहा था । सर्दियों की घनी धुंध ने जादूगर बन सबकुछ अपने अचल में समेट लिया था। मुझे भी । मैं दबे पाँव हॉस्टल के गेट से बाहर निकल आई। हवा का कण-कण ठंड से भरा हुआ था। पेड़ भी कुछ इस तरह से बर्फीली ओस से लदे थे कि उनके स्पर्श मात्र से कंपकैपी छूट जाए। मैं घुटनों के बल बैठकर गड्ढा खोदने लगी। इससे पहले कि घास में छिपी खून जमा देनेवाली ठंडक मेरी हड्डियों में जम जाती, मैं घुटनों के बल बैठकर तेजी से गड्ढे को और गहरा खोदने लगी। मेरी सुन्न पड़ती उँगलियों ने सिक्के और ओइजा शीट को मिट्टी में गाड़कर ही राहत की साँस ली। मैंने राक्षसों को दफन कर दिया ।
Language: Hindi
Page No: 288
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