
Vaigyanik Jagdish Chandra Basu Ke Mahan Vichar: The Profound Thoughts Of Scientist Jagdish Chandra Basu-Saawan Kumar Bag, Dr. Meher Wan
Vaigyanik Jagdish Chandra Basu Ke Mahan Vichar: The Profound Thoughts Of Scientist Jagdish Chandra Basu-Saawan Kumar Bag, Dr. Meher Wan
About the Products:
कलकता के टाउन हॉल में मिलीमीटर हट 2 का पहली बार प्रदर्शन करने से लेकर पौधों में तंत्रिकातंत्र मौजूद होने तक के युगांतकारी आविष्कारों के प्रणेता महान् वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु से सभी कम या ज्यादा अवश्य परिचित हैं, लेकिन जगदीश चंद्र बसु के लेखक और दार्शनिक पक्ष से बहुत कम लोग ही परिचित हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय भाषाओं की पहली विज्ञान-गल्प जगदीश चंद्र बसु ने बॉग्ला में 'निरुददेशेर कहिनी' के नाम से लिखी थी। उनके लिखे लेख, विज्ञान-गल्प, यात्रावत्तांतों और भाषणों में उन्होंने अपने जीवन की कई रोमांचकारी घटनाओं को शब्दों में बाँधकर एक पुस्तक प्रकाशित की थी, जिसका नाम उन्होंने ' अव्यक्त ' दिया था। इन कहानियों, लेखों और भाषणों के माध्यम से जनमानस में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जाग्रत् करने का प्रयास किया था। वैज्ञानिक के विभिन्न लेखों मे संगहात शत उन यह लेखन आज भी वैज्ञानिक और सामान्य जन के लिए घनघोर अआँधेरे रास्तों में रोशनी की किरणों की तरह है। वह एक लेख में लिखते हैं--' हमारा मस्तिष्क ही सबसे बड़ी प्रयोगशाला है।'
Language: Hindi
Page No: 152
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.
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Vaigyanik Jagdish Chandra Basu Ke Mahan Vichar: The Profound Thoughts Of Scientist Jagdish Chandra Basu-Saawan Kumar Bag, Dr. Meher Wan
About the Products:
कलकता के टाउन हॉल में मिलीमीटर हट 2 का पहली बार प्रदर्शन करने से लेकर पौधों में तंत्रिकातंत्र मौजूद होने तक के युगांतकारी आविष्कारों के प्रणेता महान् वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु से सभी कम या ज्यादा अवश्य परिचित हैं, लेकिन जगदीश चंद्र बसु के लेखक और दार्शनिक पक्ष से बहुत कम लोग ही परिचित हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय भाषाओं की पहली विज्ञान-गल्प जगदीश चंद्र बसु ने बॉग्ला में 'निरुददेशेर कहिनी' के नाम से लिखी थी। उनके लिखे लेख, विज्ञान-गल्प, यात्रावत्तांतों और भाषणों में उन्होंने अपने जीवन की कई रोमांचकारी घटनाओं को शब्दों में बाँधकर एक पुस्तक प्रकाशित की थी, जिसका नाम उन्होंने ' अव्यक्त ' दिया था। इन कहानियों, लेखों और भाषणों के माध्यम से जनमानस में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जाग्रत् करने का प्रयास किया था। वैज्ञानिक के विभिन्न लेखों मे संगहात शत उन यह लेखन आज भी वैज्ञानिक और सामान्य जन के लिए घनघोर अआँधेरे रास्तों में रोशनी की किरणों की तरह है। वह एक लेख में लिखते हैं--' हमारा मस्तिष्क ही सबसे बड़ी प्रयोगशाला है।'
Language: Hindi
Page No: 152
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